गरीबों के इलाज में लापरवाही बरत रहे चैरिटेबल अस्पताल

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    गरीबों के इलाज में लापरवाही बरत रहे चैरिटेबल अस्पताल
    मुंबई  -  

    गरीब और कमजोर तबके के लोगों का अस्पताल में अच्छी तरह से उपचार हो इसके तहत प्रशासन की तरफ से कई चैरिटेबल अस्पतालों में सुविधाएं उपलब्ध कराई गयी हैं, लेकिन कई चैरिटी वाले अस्पताल गरीबों के ईलाज में लापरवाही बरत रहे हैं। ये अस्पताल जसलोक हॉस्पिटल एंड रीसर्च सेंटर, गोपीकृष्ण पिरामल मेमोरीयल हॉस्पिटल और म्हसकर सतिका गृह एंड जनरल नर्सिंग होम हैं। इन अस्पतालों के विरोध में हिंदू जनजागृति समिति सहित अन्य समान विचारधारा वाले सगठनों ने आवाज उठाई है। इस संदर्भ में समिति ने चैरिटी कमिश्नर सुरेश कांबले के पास शिकायत कर कार्रवाई करने की मांग की है।

    चैरिटी वालों अस्पतालों को प्रशासन बेहद कम दाम पर जमीन उपलब्ध कराता है। इन अस्पतालों को कोर्ट के आदेशानुसार गरीब लोगों के लिए 10 फीसदी बेड का आरक्षण और नि:शुल्क उपचार करना अनिवार्य है। अगर किसी गरीब मरीज की सालाना आय 50 हजार से अधिक और 1 लाख से कम हुई तो ऐसे मरीज के लिए छुट दर पर उपचार करना अनिवार्य है। अस्पताल द्वारा दी जा रही तमाम छूटों को एक सुचना पट्टी पर विवरण देना अस्पताल के लिए अनिवार्य किया गया है, लेकिन बावजूद इसके जसलोक हॉस्पिटल एंड रीसर्च सेंटर, गोपीकृष्ण पिरामल मेमोरियल हॉस्पिटल और म्हसकर सतिका गृह एंड जनरल नर्सिंग होम के बाहर इस तरह का कोई सूचना पट्टी नहीं लगाई गयी है।

    हिंदु जनजागृती समिती के अरविंद पानसरे ने कहा कि अगर हमारी मांगे नहीं मानी गयी तो हम अस्पतालों के विरोध में आन्दोलन भी करेंगे।

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