बीएमसी कमिश्नर मतलब मुख्यमंत्री का चपरासी, मुख्यमंत्री से नाराज महापौर के बिगड़े बोल


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बीएमसी में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बढ़ते हस्तक्षेप से महापौर विश्वनाथ महाडेश्वर बीएमसी कमिश्नर से इतने नाराज हुए कि उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान कह दिया कि बीएमसी कमिश्नर मतलब मुख्यमंत्री का चपरासी। वे यही नहीं रुके उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए सवाल किया कि कमिश्नर सहित सभी अधिकारी मंत्रालय में अधिक नजर आते हैं, क्या मुख्यमंत्री मंत्रालय के साथ साथ बीएमसी भी चला रहे हैं?

बीएमसी के कार्यक्रम में महापौर को न्योता नहीं
बताया जाता है कि बीएमसी के विकास नियोजन विभाग का मोबाइल ऐप का उदघाटन किया जा रहा था। इसका उदघाटन सीएम फडणवीस को करना था लेकिन इस कार्यक्रम में महापौर विश्वनाथ महाडेश्वर को ही नहीं बुलाया गया था, जबकि इस कार्यक्रम में नियोजन विभाग के प्रमुख अभियंता संजय दराडे, आपातकालीन विभाग के प्रमुख महेश नार्वेकर सहित कमिश्नर अजोय मेहता भी उपस्थित थे।

 
सीएम की दखलंदाजी से महापौर परेशान 
यही नहीं आरोप यह भी है कि सीएम हमेशा बीएमसी के कामकाज में दखल देते हैं और कामकाज और हस्तक्षेप करते हैं। वे अधिकारियों को तलब कर उनसे काम के बारे में जानकारी भी लेते हैं जबकि इस बारे में विश्वनाथ महाडेश्वर कई बार नाराजगी प्रकट कर चुके हैं।  महाडेश्वर कई बार इस बात को लेकर भी नाराज हुए हैं कि कमिश्नर से लेकर अतिरिक्त कमिश्नर सहित अधिकारी भी काम के समय कोई हाजिर नहीं होता। इनकी हमेशा मंत्रालय में ही होने की सूचना मिलती है।

महापौर की उपेक्षा क्यों?
महापौर ने इस बात को लेकर दुःख जताया कि बीएमसी के हर कार्यक्रम में महापौर को बुलाया जाता है, मुख्यमंत्री द्वारा पास किये गए हर कानून की एक प्रति महापौर को भी दी जाती है लेकिन उनके लिए ऐसा नहीं है।

आपको बता दें कि बीएमसी में शिवसेना और बीजेपी की युति है। शिवसेना बीजेपी के बगैर कुछ कर भी नहीं सकती। इसीलिए मज़बूरी शिवसेना के पास भी है, जबकि बीजेपी की सरकार होने के कारण बीजेपी इस चीज का फायदा भी उठा रही है।

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