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मुंबई: ‘मुंबईकर्स मोहब्बतखाना' घर का बचा हुआ खाना देगा गरीबों को

यह संगठन बचे हुए भोजन को भूखे पेट सोने वाले गरीब बेसहारा लोगों को उपलब्ध कराएगा, ताकि एक दूसरे की आवश्यकता पूरी हो सके।

मुंबई: ‘मुंबईकर्स मोहब्बतखाना' घर का बचा हुआ खाना देगा गरीबों को
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मुंबई (mumbai) जैसे शहर में जहां करोड़ों की जनसंख्या है, इसमें सैकड़ों या हजारों ऐसे भी हैं जो सड़कों पर भुखे पेट सोते हैं, तो वहीँ मुंबई में ही कई बड़े बड़े होटल्स भी हैं जहां हर रोज सैकड़ों लोगों का भोजन बरबाद (waste food) हो जाता है, होटलों (hotels) के अलावा कई परिवार ऐसे भी हैं जो बचा हुआ खाना कचरे में फेंक देते हैं।

हालांकि यह दोनों तथ्य ही शर्मनाक हैं। लेकिन इन दोनों तथ्य को पूरा करने और एक दूसरे की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ‘मुंबईकर्स मोहब्बतखाना’ (mumbaikars mohbbatkhana) ने कमर कसी है। यह संगठन बचे हुए भोजन को भूखे पेट सोने वाले गरीब बेसहारा लोगों को उपलब्ध कराएगा, ताकि एक दूसरे की आवश्यकता पूरी हो सके।

इसके तहत कई स्थानों पर रेफ्रिजरेटर रखा जाएगा, जिसमें बचा हुआ खाना लोग उसमें रख सकेंगे।

‘मुंबईकर्स मोहब्बतखाना’ का एक मोटो है, 'नेवर एवर स्लीप हंग्री (never ever sleep hungry) जिसके तहत बचे हुए भोजन को गरीब और भीखारी लोगों को दिया जाएगा।इसके लिए 'मुंबईकर मोहब्बतखाना' की तरफ से सामुदायिक फ्रीज' की भी व्यवस्था की गयी है।

इस संगठन द्वारा स्थापित 'कम्यूनिटी फ़्रीज़' की मदद से, इसमें सहायता करने वाले और सहायता पाने वाले, दोनों को एक ही मंच पर लाने का काम करेगी।

सामुदायिक फ्रिज एक बड़ा सा रेेफ्रिजरेटर है जहां हर कोई जरूरतमंदों के लिए अपने घर में बचे हुुयेे खाद्य पदार्थों को रख सकता है और आसानी से कोई भी जरूरतमंद ले जा सकता है। तीन हफ़्ते पहले नागपाड़ा जंक्शन (nagpada junction) के सारावी होटल के बाहर, उसके बाद ठाणे में और शनिवार को माटुंगा में रुइया कॉलेज (ruia college) के सामने कोल्ड स्टोरेज रखा गया था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 3 दिनों में माटुंगा के कई लोगों ने इसमें भोजन डाला। वर्तमान में यह परियोजना केवल 3 स्थानों पर चल रही है।  लेकिन आने वाले दिनों में यह परियोजना अधिक स्थानों पर लागू की जाएगी। इसमें स्थानों पर न केवल रेफ्रिजरेटर रखना बल्कि उसकी देखभाल करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

इस फ्रिज में धर्मार्थ संगठन, रेस्तरां, होटल, मंदिरों से भी मदद मांगी जाएगी ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंदों के लिए खाना मैनेज हो जाए।

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