महिला एवं बाल विकास विभाग की कमिश्नर नयना गुंडे ने बताया कि राज्य के सभी सरकारी, सेमी-गवर्नमेंट ऑफिस और दस से ज़्यादा कर्मचारियों वाले प्राइवेट संस्थानों में महिलाओं के साथ सेक्सुअल हैरेसमेंट रोकने के लिए ‘इंटरनल कमेटी’ बनाना ज़रूरी है और ऐसा न करने पर सज़ा के तौर पर कार्रवाई की जाएगी।(It is necessary to form an internal committee to prevent sexual harassment of women at the workplace says Commissioner Nayana Gunde)
50,000 रुपये तक का फाइन
इंटरनल कमेटी न बनाने पर संबंधित मालिक या हेड पर 50,000 रुपये तक का फाइन लगाया जा सकता है। अगर यह गलती दोहराई जाती है, तो संबंधित संस्थान का लाइसेंस कैंसिल कर दिया जाएगा या दोगुना फाइन लगाया जाएगा।
ऑनलाइन पोर्टल शी-बॉक्स पर अपलोड किया जाना अनिवार्य
महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपनाए गए सख्त रुख के अनुरूप महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं महिलाओं के यौन उत्पीड़न निवारण अधिनियम 2013) (पॉश एक्ट 2013) का प्रभावी क्रियान्वयन प्रदेश में किया जा रहा है। गठित आंतरिक समिति का विवरण केंद्र सरकार के ऑनलाइन पोर्टल शी-बॉक्स (https://shebox.wcd.gov.in/) पर अपलोड किया जाना अनिवार्य है। इससे शिकायतों के निवारण एवं निगरानी में सुविधा होगी।
10 या अधिक कर्मचारी कार्यरत ऑफिस में जरूरी
पॉश एक्ट के अनुसार सभी सरकारी एवं अर्धसरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, स्थानीय निकायों, सरकारी कंपनियों, निजी कंपनियों एवं उद्योगों, गैर सरकारी संगठनों, ट्रस्टों, सोसाइटियों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सेवा एवं वित्तीय क्षेत्र के प्रतिष्ठानों, खेल संस्थानों, ऑडिटोरियम, वितरण एवं बिक्री केंद्रों आदि, जिनमें 10 या अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, के लिए आंतरिक समिति का गठन करना अनिवार्य है।
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