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बढ़े हुए बिजली बिल का भार उठाएगी राज्य सरकार

यह रियायत केवल घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए होगी। व्यावसायिक और औद्योगिक बिजली उपभोक्ताओं के लिए यह रियायत लागू नहीं होगी। इस प्रस्ताव को अगली कैबिनेट बैठक में पास किए जाने की संभावना है।

बढ़े हुए बिजली बिल का भार उठाएगी राज्य सरकार
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लॉकडाउन में 3 महीने के दौरान बिजली का बिल नहीं आया था,, लेकिन चौथे महीने जब बिल आया तो लोगों के होश उड़ गए। बिजली के बिल बेतहाशा बढ़े हुए थे। मीटर के रिडिंग में और बिल की राशि में कोई तालमेल ही नहीं था। रिडिंग से कई गुना राशि बिल में जोड़ी गयी है।

इस मुद्दे को लेकर बॉलीवुड के कई सितारों ने भी आवाज उठाई थी, साथ ही आम नागरिकों में अभी भी नाराजगी फैली है। नागरिकों का कहना है कि, लॉकडाउन में कोई काम धंदा नहीं होने के कारण जहां उनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही काफी खराब है तो ऊपर से यह बढ़े हुए बिजली के बिल से वे और भी तनाव महसूस कर रहे हैं। इसे लेकर लोगों ने सरकार से दखल देने की मांग की थी। सोशल मीडिया में भी लोगों ने इसके खिलाफ़ आवाज उठाई।

इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए एक प्रस्ताव भी तैयार किया गया है जिसमें सरकार उपयोग की जाने वाली वास्तविक इकाई यानी यूज की हुई यूनिट और आए हुए बिजली बिल की राशि के बीच के अंतर को सरकार के द्वारा वहन किया जाएगा।

लॉकडाउन के दौरान, बिजली वितरण कंपनियों के कर्मचारी यूनिट दर्ज करने नहीं आ पाए थे। ग्राहकों को जून महीने में जो बिल भेजा गया उसमें 3 महीने का बिल भेजा गया था।

लेकिन अधिकांश बिजली उपभोक्ताओं ने बिल सामान्य से अधिक आने की शिकायत की। कईयों का कहना था कि, वे तालाबंदी के दौरान ज्यादातर घर पर ही नहीं थे, इसके बावजूद इतना अधिक बिल आया। इसके बाद कंपनियों ने बिजली उपभोक्ताओं को 3 समान किस्तों में अपने बिजली बिलों का भुगतान करने की सुविधा दी गई थी, लेकिन उपभोक्ताओं का असंतोष बना रहा।

इसे ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने यूनिट उपयोग के अनुसार बिजली बिल की कुछ राशि का भुगतान करने का निर्णय लिया है।  राज्य सरकार को इसके लिए 1,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा और ऊर्जा विभाग ने वित्त विभाग के साथ इस विषय पर चर्चा की और एक प्रस्ताव तैयार किया।  MSEDCL के साथ, राज्य सरकार राज्य की सभी कंपनियों के बिजली उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करेगी, जिनमें BEST, Adani और Tata power जैसी कंपनियां शामिल हैं।

प्रस्ताव के अनुसार, पिछले साल अप्रैल, मई और जून 2019 में बिजली की खपत और 2020 में एक ही महीने में बिजली बिल की तुलना की जाएगी।  उसके बाद, 100 यूनिट तक बिजली की खपत का अंतर पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा कवर किया जाएगा।  दूसरे शब्दों में, अगर पिछले साल अप्रैल में, बिजली उपभोक्ता ने 80 यूनिट बिजली का उपयोग किया और इस वर्ष 100 यूनिट बिजली का बिल प्राप्त हुआ है, तो 20 इकाइयों के अंतर का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

इसी तरह, राज्य सरकार 101 से 300 यूनिट तक बिजली की खपत का 50 प्रतिशत अंतर वहन करेगी।  अगर बिजली की खपत 301 और 500 यूनिट के बीच है, तो राज्य सरकार 25 प्रतिशत का अंतर वहन करेगी।

यह राशि ग्राहक के अगले बिल से काट ली जाएगी, जिसने बिजली बिल का भुगतान किया है।  यह रियायत केवल घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए होगी। व्यावसायिक और औद्योगिक बिजली उपभोक्ताओं के लिए यह रियायत लागू नहीं होगी। इस प्रस्ताव को अगली कैबिनेट बैठक में पास किए जाने की संभावना है।

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