Advertisement

डोर टू डोर जाकर टीका लगाने की योजना को एक हफ्ते में फाइनल करेगी महाराष्ट्र सरकार

हालांकि नीति का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया जा सका है, इसे एक सप्ताह के भीतर अंतिम रूप दिया जाएगा और अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

डोर टू डोर जाकर टीका लगाने की योजना को एक हफ्ते में फाइनल करेगी महाराष्ट्र सरकार
SHARES

महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra government) ने मंगलवार, 22 जून को बॉम्बे हाईकोर्ट (bombay high court) को सूचित किया कि वह एक सप्ताह के भीतर घर-घर जाकर COVID-19 टीकाकरण अभियान शुरू करने की अपनी नीति को अंतिम रूप देगी।

हालांकि यह बुजुर्गों, विकलांग व्यक्तियों और उन लोगों के लिए उपलब्ध होगा जो बिस्तर से उठ नहीं सकते हैं और टीकाकरण केंद्रों (vaccination center) पर जाने में असमर्थ हैं।

राज्य के वकील गीता शास्त्री ने मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ के समक्ष एक मसौदा नीति प्रस्तुत की।

शास्त्री ने कहा कि, राज्य ने इस तरह की नीति बनाने के लिए विशेषज्ञों और नीति निर्धारकों को मिलाकर एक विशेष कार्यबल का गठन किया है।

हालांकि नीति का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया जा सका है, इसे एक सप्ताह के भीतर अंतिम रूप दिया जाएगा और अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

पीठ ने शास्त्री की दलीलों को स्वीकार किया और कहा, "प्रथम दृष्टया, हमारी राय है कि टास्क फोर्स सही दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, हम ऐसे उपायों को शामिल करने के लिए टास्क फोर्स को छोड़ देते हैं जो बुजुर्ग और विकलांग नागरिको के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं।"

अदालत ने कहा, "हमें उम्मीद है कि जब हम इस जनहित याचिका पर आगे विचार करेंगे, तो राज्य हमें स्वीकृत दिशानिर्देश दिखाने की स्थिति में होगा।"

बता दें कि कोर्ट दायर की गई उस जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें वकील धृति कपाड़िया द्वारा दायर एक याचिका भी शामिल है, जिसमें 75 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और विशेष रूप से विकलांग या अपाहिज व्यक्तियों के लिए घर-घर COVID-19 टीकाकरण की मांग की गई थी।

इसके अलावा, पीठ ने महाराष्ट्र सरकार और बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) को शहर में मानसिक रूप से बीमार और बेघर लोगों को दिए जाने वाले टीकों का नगरपालिका वार्ड-वार विवरण प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया।

यह निर्देश वकील सरोश भरूचा द्वारा दायर एक अन्य जनहित याचिका पर आया, जिसमें नागरिकों तक टीकों की अधिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अदालत के हस्तक्षेप की मांग की गई थी।

भरूचा ने बताया कि COVID-19 टीकाकरण पर मौजूदा राज्य दिशानिर्देशों में उन लोगों को शामिल नहीं किया गया है जो मानसिक रूप से बीमार थे और जो बिना कानूनी अभिभावक के थे, और टीका प्राप्त करने के लिए सूचित सहमति देने की स्थिति में नहीं थे।

HC ने राज्य और नगर निगम के अधिकारियों से अगले सप्ताह तक इस मुद्दे पर जवाब देने को कहा।

HC ने आगे  कहा, "इस मुद्दे पर आपका हलफनामा कुछ नहीं कहता है। यह एक बहुत ही जटिल समाज हैं। किसी को भी नजरअंदाज या उपेक्षित नहीं किया जा सकता है।"

अदालत उपरोक्त जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 29 जून को करेगी।

यह भी पढ़ें: BMC आज से शुरू करेगी डोर टू डोर जांच अभियान

Read this story in English
संबंधित विषय
मुंबई लाइव की लेटेस्ट न्यूज़ को जानने के लिए अभी सब्सक्राइब करें