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Electricity Bill: तो इस वजह से अधिक आ रहा है बिजली का बिल

आयोग ने निर्देश दिया कि किसी की बिजली आपूर्ति को तब तक नहीं काटा जाना चाहिए जब तक कि भुगतान के संबंध में ग्राहक की शिकायतों का समाधान नहीं किया जाता है, जिसमें मासिक किस्तों में भुगतान करने का विकल्प देना शामिल है।

Electricity Bill: तो इस वजह से अधिक आ रहा है बिजली का बिल
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महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (MERC) ने बिजली कंपनियों को बिलिंग में अधिक पारदर्शिता लाने और उपभोक्ताओं की शिकायतों से जल्द से जल्द निपटने के लिए एक निगरानी तंत्र स्थापित करने का निर्देश दिया है।  साथ ही, बढ़े हुए बिजली के बिलों की शिकायतों पर चर्चा करने के लिए बिजली वितरण कंपनियों की एक बैठक भी हुई।

इस समय मुंबई में हजारों लोग बिजली के बढ़े हुए दामों को लेकर बिजली कंपनियों के खिलाफ नाराजगी प्रकट कर रहे हैं। इसे देखते हुए जून के महीने के लिए आयोग ने बिजली कंपनियों की भुगतान प्रणाली की समीक्षा करने का निर्णय लिया है, साथ ही 1 अप्रैल 2020 से संशोधित बिजली दरों में कमी की गई है। ये दरें पिछले साल की तुलना में काफी कम हैं।

इस सुधार के बाद महाराष्ट्र में घरेलू उपभोक्ताओं सहित सभी श्रेणियों के लिए बिजली की दरों में कमी आई। संशोधित बिजली दर जारी करने के बाद, अप्रैल के बाद बिजली की खपत के लिए मासिक भुगतान के लिए कोई ईंधन समायोजन शुल्क (एफएसी) नहीं लगाया गया है।  

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय किए गए हैं कि ईंधन समायोजन शुल्क अब लागू न हो।

चूंकि Covid-19 के कारण घोषित किये गए लॉकडाउन के दौरान ही बिजली दर आदेश जारी कर दिया गया था, इसलिए आयोग ने कुछ मामलों में बिजली कंपनियों को लॉकडाउन नियमों का पालन करने और ग्राहकों को कुछ राहत प्रदान करने के लिए नीति बनाने की अनुमति दी, जैसे मीटर से रिडिंग लेने के लिए ग्राहक के भवन / घर में जाने की कोई जरूरत नहीं, मार्च से मई तक (जहां स्वचालित मीटर रीडिंग सुविधा उपलब्ध है) छोड़कर लॉकडाउन की अवधि के दौरान औसत बिजली की खपत के आधार पर बिजली का भुगतान किया जाना चाहिए।

लॉकडाउन में जब कुछ ढील दी गई तो बिजली कंपनियों ने उपरोक्त दिए गए नियम के अनुसार ग्राहकों को बिल भेजना शुरू किया। लेकिन तीन महीने (मार्च से मई) औसत बिल के बाद जब ग्राहकों को जून महीने में बढ़ा हुआ बिल मिला तो उनमें भ्रम पैदा हो गया। इस संबंध में आयोग ने 27 जून 2020 को सभी 4 वितरण लाइसेंसधारियों के प्रमुखों की बैठक आयोजित की।

यह स्पष्ट किया कि लॉकडाउन अवधि के दौरान, मार्च-अप्रैल-मई इन तीन महीनों के लिए औसत बिजली की खपत के आधार पर भुगतान किया गया था। यह महीना भी गर्मी का है जिससे बिजली का उपभोग भी अधिक होता है।

इसलिए, मार्च, अप्रैल और मई के तीन महीनों में से प्रत्येक के लिए औसत भुगतान राशि को समायोजित करने के बाद, जून महीने में शेष राशि के साथ एक उच्च राशि का भुगतान करने का बिल भेजा जा रहा है।

इस सभी मामलों को देखते हुए आयोग ने बिजली के बिलों के भुगतान में पारदर्शिता बढ़ाने और शिकायतों का त्वरित जवाब देने के लिए एक तंत्र स्थापित करने का भी निर्देश दिया है। साथ ही आयोग ने अन्य निर्देश भी दिए हैं जैसे, शिकायत प्राप्त होने के एक दिन के भीतर जवाब देना होगा। ग्राहकों को मीटर में रिडिंग, लागू बिजली दर, बिजली दर के चरण में लाभ और पिछले वर्ष के संबंधित महीने के भुगतान की राशि और वर्तमान महीने के भुगतान की राशि की और उनके सटीकता की स्वयं-जांच करने के लिए ऑनलाइन सॉफ्टवेयर प्रदान किया जाना चाहिए, जिन ग्राहकों को मार्च से मई की अवधि के लिए बिजली का बिल औसत भुगतान दोगुना है, उन्हें 3 किस्तों में भुगतान करने का विकल्प दिया जाना चाहिए।

आयोग ने निर्देश दिया कि किसी की बिजली आपूर्ति को तब तक नहीं काटा जाना चाहिए जब तक कि भुगतान के संबंध में ग्राहक की शिकायतों का समाधान नहीं किया जाता है, जिसमें मासिक किस्तों में भुगतान करने का विकल्प देना शामिल है। यदि ग्राहक बिजली वितरण कंपनी से संतुष्ट नहीं है तो उसके पास शिकायत निवारण फोरम और विद्युत लोकपाल से शिकायत करने का विकल्प होगा।

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