आखिर क्यो भरता है मुंबई में पानी


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मुंबई में लगभग हर बारिश में पानी भर जाता है।लाख कोशिशो के बाद भी अभी भी मुंबई मे कई जगह ऐसे है जहां हल्की हल्की सी बारिश पर जलजमाव हो जाता है। आईये देखते है आखिर क्यों भर जाता है मुंबई में बार बार मॉनसून के दौरान पानी

क्यो भरता है पानी

बीएमसी ने जो गटर बनाए हैं, वे सपाट बनाए हैं। इससे ज्वार-भाटे का प्रतिकूल परिणाम होता है।

गटर मलबे से लबालब भरे रहते हैं।

पानी की निकासी करने वाली नालियां समुद्र तल से काफी नीचे हैं।

समुद्र में पानी फेंकने वाली 45 निकास नालियों में से केवल तीन पर दरवाजे हैं, इसलिए जब समुद्र में ज्वार आता है, तब इन तीन नालियों से ही समुद्री पानी को भीतर आने से रोका जा सकता है।

मुंबई के गटरों की क्षमता प्रतिघंटा 25 मिमी बारिश का पानी बाहर निकालने की है।

बड़े नालों से होकर डाली गईं केबल, पाइप लाइनें तमाम नालों के प्रवाह को रोकती हैं।

बीएमसी द्वारा नालों की मरम्मत की अनदेखी, गलत जगहों पर छोटे नालों का निर्माण और नालों की गलत रचना।

26 जुलाई 2005 में 944 मिमी. बारिश

26 जुलाई 2005 में मुंबई में सबसे ज्यादा 944 मिमी. बारिश हुई थी। जिससे एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। तब बीएमसी ने ‘बृहनमुंबई स्टार्म वॉटर डिस्पोजल सिस्टम यानीब्रिमस्टोवॅड योजना’ शुरू की। जिसके तहत 58 प्रोजेक्ट शुरू किए गए।इसके तहत मुंबई के ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता बढ़ाकर 50 मिमी. तक किया जाना था। इसके अलावा पानी निकालने के लिएआठ पंपिंग स्टेशन बनाए जाने थे। प्रोजेक्ट को दो फेज 2011 और 2015 में पूरा होना था। लेकिन दोनों फेज में ही प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका।

मुंबई  में ड्रेनेज  की परेशानी काफी बड़ी है। हाई टाई की वजह से यहां पर हमेशा बारिश होती है और फिर ये पानी शहरों के बाहर नहीं निकल पाता है जिससे कि निचले इलाकों में पानी भर जाता है।राज्य के बहुत सारे निचले इलाको में लोकल ट्रेन की पटरियां समुद्र लेवल से नीचे हैं। ऐसे में वो पानी में डूब जाती है जिससे की लोकल ट्रेनों  की आवाजाही पर भारी असर पड़ता है।यहां का ड्रेनेज सिस्टम काफी पुराना है जिसे पूरी तरह से नहीं बदला गया है। इसलिए यहां पर अक्सर पानी भर जाता है

जिन जगहों पर झुग्गी-झोपडिय़ां हैं उसके आस-पास तो कोई भी कूड़ेेदान नहीं है। ऐसे में यहां पर कूड़े का ढेर लग जाता है जो कि बारिश के समय में कई बीमारियों को जन्म देता हैमुंबई की नालियों से कूड़ा बाहर कर तो दिया जाता है,लेकिन समय रहते उसे वहां से हटाया नहीं जाता है। फिर वही कूड़ा फिर बारिश के पानी के साथ बहकर दोबारा से नालियों में चला जाता है


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