इच्छामृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अन्यायपूर्ण, नारायण - ईरावती लवाटे ने लगाया आरोप

नारायण - ईरावती लवाटे दंपत्ति ने इच्छामृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा की हमारे लिए ये निर्णय सही नहीं है।

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राष्ट्रपति के पास इच्छाम़ृत्यु की याचिका देनेवाले नारायण - ईरावती लवाटे दंपत्ति ने इच्छामृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा की हमारे लिए ये निर्णय सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया है की जो लोग बीमार है और उनको मरने की इच्छा हो वो इच्छा मृत्यु कर सकते है हालांकी कोर्ट ने इसके साथ कई तरह के गाईडलाइंस भी रखे है।


जिन्हे इच्छामृत्यु चाहिये आप उन्हे जीने के लिए मजबूर कर रहे है । जो बीमार नही और पर वो मरना चाहते है उनके लिए सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला नहीं है। हम सिर्फ अपनी बात कर रहे है हमे सिर्फ फांसी चाहिये। लवाटे दंपत्ति ने दिसंबर 2017 में राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी है। लवाटे दंपत्ति का कहना है की अगर 31 मार्च 2018 तक उनकी मांग पर कोई जवाब नहीं आया तो वो एक दूसरे की हत्या कर देंगे और इसकी जिम्मेदार सरकार होगी।

जब तक हम स्वस्थ है तब तक हमे इच्छामृत्यु दो, कल अगर हम दोनों में से एक को भी कुछ होता है तो दूसरे को उसके उपर आश्रित होना होगा, जो हमे नहीं चाहिये। राष्ट्रपति को हमारी मांग पर विचार करना चाहिये।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा था कि हम ये देखेंगे कि इच्छामृत्यु में यानी इच्छामृत्यु के लिए वसीहत मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हो जिसमें दो स्वतंत्र गवाह भी हों. कोर्ट इस मामले में पर्याप्त सेफगार्ड देगा. इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए

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