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अंधेरी और जोगेश्वरी सहित कई इलाकों में 3 दिन से पानी नहीं, कालाबाजारी करने वालों की चांदी


अंधेरी और जोगेश्वरी सहित कई इलाकों में 3 दिन से पानी नहीं, कालाबाजारी करने वालों की चांदी
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कहते हैं, रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून।  दोहे की यह लाइन को इस समय अंधेरी और जोगेश्वरी वेस्ट इलाके में रहने वालों से अधिक कोई नहीं समझ सकता। पिछ्ले 3 दिनों से ओशिवारा, जोगेश्वरी और अंधेरी वेस्ट सहित वर्सोवा के कई इलाकों मे पानी नहीं आ रहा है, जिससे आम लोगों के बीच काफी अफरा तफरी का माहौल है, और पानी कब आएगा इसकी भी जानकारी नहीं मिल या रही है।

इन इलाकों में पानी के लिए लोगों की परेशानी आसानी से देखी जा सकती है। लोग अपने परिचितों, मित्रों और आसपास रहने वाले रिश्तेदारों के यहां से पानी ला रहे हैं।

इसी बीच पानी बेचने वालों की चांदी हो गयी है, टैंकर वाले लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए ग्राहकों से मुंहमांगी कीमत मांग रहे हैं।

पानी खरीदने वाले एक ग्राहक ने बताया कि उसने एक टैंकर वाले से 500 रुपये में 800 लीटर पानी खरीदने की बात की थी, लेकिन बाद में टैंकर वाला 1500 रुपये मांगने लगा।इसके बाद भी लोगों ने पानी मंगाया।

कहीं कहीं बीएमसी के टैंकर से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है लेकिन वहां भी 2 किमी तक लाइन लगी हुई है। लोग पीने का पानी खरीद कर ला रहे हैं।

लोग इसीलिए भी पैनिक हो रहे हैं कि अफवाह फैल रही है कि पानी आने मे अभी 2 से 3 दिन और लग सकता है।

अधिक जानकारी के लिए जब बीजेपी की स्थानीय विधायक भारती लवेकर से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

बताया जाता है कि इन इलाकों में जिस पाइप लाइन से पानी की सप्लाई की जाती है वह अंधेरी ईस्ट से होकर आती है। गुरुवार को अंधेरी ईस्ट में मेट्रो कार्य के कारण पानी की पाइप लाइन डैमेज हो गयी जिससे लाखों लीटर पानी सड़कों पर बह गया। 

अब डैमेज पाइप लाइन की मरम्मत का कार्य किया जा रहा है, लेकिन यह कार्य कब तक समाप्त होगा इसकी जानकारी खुद K/W वॉर्ड के बीएमसी अधिकारी नहीं दे पा रहे हैं। 

इस बाबत जब संबंधित कार्यालय में फोन किया गया तो एक महिला ने फोन उठाया और यह कह कर फोन काट दिया कि काम अधिक है और जब काम पूरा होगा तो पानी आ जायेगा।

पानी कब तक आएगा इसकी सटीक जानकारी उपलब्ध कराने में अधिकारी और जनता के नुमाइंदे भले ही कन्नी काट रहे हो लेकिन जिस तरह से हजारों लोग पीछे 3 दिनों से पानी के लिए परेशान हो रहे हैं वह पानी बचाने का एक बड़ा सबक साबित हो सकता है।


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