नेशनल हाईवे किनारे फिर छलकेंगे जाम

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नेशनल हाईवे किनारे फिर छलकेंगे जाम

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक बड़ी राहत देते हुए कहा है कि अगर कोई स्टेट हाईवे शहर के बीच से होकर गुजरता है और उसे डिनोटिफाई किया जाता है तो पहली नजर में गलत नहीं होगा। शहर के बीच से गाड़ियां आम तौर ओर धीमी रफ्तार से चलती हैं। कोर्ट के इस फैसले से शहर के अंदर हाईवे से लगी शराब की दुकानों के मालिकों को अब राहत मिल सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय उस सुनवाई के दौरान दिया है जिसमें यह कहा गया था कि अब हाईवे के 500 मीटर के इलाके में शराब पर रोक लगेगी। कोर्ट ने फैसले में आगे कहा कि शहर के अंदर के हाईवे और शहर से दूर के हाईवे में बहुत अंतर है। हाईवे का मतलब है जहां तेज रफ्तार में गाडियां चलती हों। कोर्ट ने हाईवे के 500 मीटर के दायरे में शराब बिक्री पर रोक लगाने के संबंध में कहा कि हाईवे के 500 मीटर दायरे में शराब बिक्री पर रोक के पीछे सोच है कि लोग शराब पीकर तेज रफ्तार में गाड़ी न चलाएं।

बता दें कि चंडीगढ में कई स्थानों पर महामार्ग का नाम बदलकर 'मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड' कर दिया गया है। इसको लेकर 'अराइव सेफ इंडिया' नामकी एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे पर शराब की दुकानों को बंद करने का फैसला जनहित में लिया था। ऐसे में चंडीगढ प्रशासन का सुप्रीम कोर्ट के आदेश को निष्प्रभावी करने के लिए 16 मार्च 2017 का नोटिफिकेशन अवैध है और रद्द किया जाना चाहिए। हालांकि, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस याचिका को पहले ही खारिज कर दिया  है।

मुंबई और कुछ शहरों में 1 अप्रैल को सरकार ने मुंबई के हाईवे को डीनोटीफाई के अंतर्गत लाया। इसके अंतर्गत लाने से सुप्रीम कोर्ट के फैसले से छुट मिल जाती है। इस फैसले से राज्य सरकार को लगभग 6500 करोड़ का घाटा आ रहा था और कई लोग बेरोजगार हो गए थे।


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