नालों से सटे अवैध झोपड़े: बीएमसी के लिए मुसीबत तो नेताओं के लिए वोट का केंद्र बने

मुंबई के कई स्थानों पर नालों के किनारे लोग अवैध रूप से झोपड़े बना कर रहते हैं। यह अवैध झोपड़े मानसून के समय पानी के जमा होने का कारण बनते हैं। वाबजूद इसे बीएमसी इन झोपड़ों पर कोई कार्रवाई नहीं करती। मुंबई में नालों से सट कर लाखों की संख्या में झोपड़े बने हैं। यह झोपड़े दहिसर, गोरेगांव, अंधेरी, माहिम, कुर्ला, बीकेसी, वर्ली सहित अन्य स्थानों पर भी स्थित हैं।

नाम न छापने की शर्त पर माहिम के एक स्थानीय निवासी ने बताया की यहां बड़े पैमाने पर मजदुर वर्ग के रहते हैं। साथ ही यहां छोटे मोटे व्यवसाय भी चलते हैं। व्यवसाय चलाने वाले मालिक मजदूरों को यहीं रहने के लिए घर भी देते हैं।

वर्ली में वर्ली गटर के नाम से मशहूर नाले से लग कर करीब 300-350 अवैध झोपड़े हैं।1996 में 1238 झोपड़े थे,जबकि 2011 में यहां नए 279 झोपड़े बन गए। प्रश्न यह है कि जब झोपड़े बन रहे थे तब मनपा क्या कर रही थी? यही नहीं जब जब मनपा कार्रवाई भी करती है तब तब उसे राजनीतिक दबाव का सामना भी करना पड़ता है।

इस मुद्दे पर जब मुंबई लाइव के संवाददाता ने जी/साउथ के वॉर्ड ऑफिसर प्रशांत सकपाले ने उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही उन्होंने कुछ भी बोलसे से मना कर दिया।जबकि इस विषय पर जी/उत्तर के सहायक आयुक्त रमाकांत बिराजदार ने मुंबई लाइव से कहा कि जी/उत्तर में कहीं भी अवैध झोपड़े नहीं हैं, यहां जगह है ही नहीं इसीलिए झोपड़े बनाए जाने का सवाल ही नहीं है। वे आगे कहते हैं कि हम समय समय पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करते हैं।

जबकि एल वॉर्ड के सहायक आयुक्त अनिस खान का भी कहना है कि अवैध झोपड़ों पर हम कार्रवाई करते हैं। इस समय कहीं भी इस तरह की कोई खबर नहीं है अगर कही से कुछ अवैध झोपड़ो की खबर मिलती है तो हम जरुर कार्रवाई करेंगे।


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