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क्रिकेट के डकवर्थ-लुइस नियम को बनाने वाले में से एक टोनी लुइस का हुआ निधन


क्रिकेट के डकवर्थ-लुइस नियम को बनाने वाले में से एक टोनी लुइस का हुआ निधन
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क्रिकेट को डकवर्थ-लुइस जैसा नियम देने वाले गणितज्ञ टोनी लुईस का निधन हो गया है। वे 78 साल के थे। लुईस ने अपने साथी गणितज्ञ फ्रैंक डकवर्थ के साथ मिलकर साल 1997 में क्रिकेट मैच के लिए डकवर्थ-लुईस पद्धति बनाई थी जिसका प्रयोग बारिश से प्रभावित हुए मैच में किया जाता है।  इंग्लैंड में ICC के 1990 विश्व कप के दौरान डकवर्थ-लुईस ने यह नियम अपनाया था।

हालांकि यह एक जटिल नियम है जो बहुतों को समझ मे नहीं आता। इसी के चलते टोनी और फ्रैंक को कई बार आलोचना का सामना भी करना पड़ा है।  इसके बाद एक ऑस्ट्रेलियाई गणितज्ञ स्टीवन स्टर्न ने इस नियम कुछ संसोधन करके चालू स्कोरिंग-रेट के अनुसार इस नियम को पुन: पेश किया। इसके बाद साल 2014 के बाद से इस नियम को डकवर्थ-लुईस-स्टर्न का नाम दिया गया। हालांकि लुईस क्रिकेटर नहीं थे लेकिन क्रिकेट और गणित में उनके योगदान के लिए साल 2010 में उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया था।

साल 1992 में विश्व कप मैच के दौरान इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच सेमीफाइनल मैच खेला जा रहा था, तब उस मैच में इस नियम को बदलने का विचार आया।  उस मैच में अफ्रीका को जीत के लिए 13 गेंदों में 22 रनों की जरूरत थी, जो काफी आसान लग रही थी। उसके बाद बारिश ने मैच रोक दिया।  सभी मान कर चल रहे थे कि यह मैच अफ्रीका आसानी से जीत 

जाएगा। लेकिन जब बारिश रुकी और डकवर्थ-लुइस के नियमानुसार दक्षिण अफ्रीका को जो लक्ष्य दिया गया वह था 1 गेंद में 22 रन, जो कि असंभव था। आखिरकार दक्षिण अफ्रीका वह मैच हार गया।इससे इस नियम की काफी आलोचना हुई थी।

इसके बाद ICC ने रन रेट के आधार पर टीमों को विजयी करना घोषित किया। यानी बारिश होने तक जिस टीम का रनरेट अधिक होता था उसे विजयी करार दे दिया जाता था। अब, डकवर्थ-लुईस नियम में, बारिश के बाद दोनों टीमों के रन और विकेट के के अंतर को माना जाता है।

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