ATS का बड़ा खुलासा: आतंकियों ने रची थी मंदिर के प्रसाद में जहर मिला कर हजारों लोगों को मौत के घाट उतारने की साजिश

आतंकी इस साजिश को दिसंबर में मंदिर परिसर में हुई श्रीमद भागवत कथा के दौरान अंजाम देने की कोशिश की गई थी, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो सके थे।

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महाराष्ट्र की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने एक बड़ी आतंकी घटना को अंजाम सेने से पहले ही घटना का भंडाफोड़ कर दिया है। इस घटना के तहत आतंकी मुंब्रा के फेमस मुंब्रेश्वर मंदिर के महाप्रसाद में जहर मिला कर सामूहिक रूप से लोगों को मौत के घाट उतारने की फिराक में थे। यही नहीं आतंकी इस साजिश को दिसंबर में मंदिर परिसर में हुई श्रीमद भागवत कथा के दौरान अंजाम देने की कोशिश की गई थी, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो सके थे।  


इस तरह हुआ खुलासा 
आपको बता दें कि इसी साल के शुरूआती महीने में एटीएस ने महाराष्ट्र्र के विभिन्न विभिन्न स्थान से कुछ लोगों को उठाया था।एटीएस को शक था कि इनके संबंध ISIS से हैं। इन्हीं लोगों से जब पुछ्ताछ हुई तब इस बात का खुलासा हुआ। ATS के अनुसार चौकानें वाली बात यह है कि जो लोग इस घटना को अंजाम देने वाले थे वे इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक के फालोवर थे।


ATS ने किया सीन रिक्रिएट 
सूत्रों के अनुसार एटीएस की टीम ने 28 जनवरी को इन संदिग्धों में से एक तलहा पैट्रिक के साथ मंदिर का दौरा किया और फिर से सीन रिक्रिएशन कर योजना को समझने की कोशिश की। जानकारी के मुताबिक पिछले साल श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया था। कथा के बाद भंडारा और प्रसाद बांटा गया था। उस कार्यक्रम में लाखों की संख्या में श्रद्धालू शामिल हुए थे।


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सामूहिक नरसंहार की थी योजना 
ATS ने इस मामले में सोमवार को चार्जशीट दायर की, चार्जशीट के मुताबिक मुंबई से सटे ठाणे के मुंब्रा इलाके में स्थति चार सौ साल पुराने मुंब्रेश्वर मंदिर पहले रेकी की गयी थी, उसके बाद यह साजिश रची गयी थी कि महाशिव रात्री के दिन यानी 4 मार्च को पूजा के महाप्रसाद में जहर मिला कर कई लोगों को मौत के घाट उतारने की योजना थी। आपको बता दें कि इस मंदिर में भगवान शिवजी के दर्शन करने के लिए श्रद्धालू बड़ी दूर दूर से आते हैं, इन श्रद्धालुओं की संख्या लाखो में होती है।अगर ये सभी महाप्रसाद खाते तो मंजर कितना भयानक होता सोच कर ही मन सिहर जाता है। एटीएस ने इस मामले में चार्जशीट दायर करते हुए सभी 10 संदिग्धों की पहचान बताई है, जिनमें से एक संदिग्ध नाबालिग है।


BMC अस्पताल भी था निशाने पर 
इसके साथ ही इस गैंग का दूसरा लक्ष्य दक्षिण मुंबई में स्थित एक बीएमसी अस्पताल में दवाओं पर केमिकल का छिड़काव कर दवाओं को जहरीला बनाना था। इससे भी बड़े पैमाने पर जनहानि की संभावना होती. पुलिस को इस बात की जानकारी उम्मत-ए-मोहम्मदिया नामके एक संगठन के वाट्सएप ग्रुप से मिली। इस अस्पताल में काम करने वाला एक कर्मचारी जैनम कुट्टेपड़ी भी इसमें शामिल था। जैनम को वारदात को अंजाम देने के बाद से से भागने का कम सौंपा गया था।


आतंकियों को सौंपा गया था यह काम 
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जैनम के अलावा जिन आतंकियों को जो काम सौंपा गया था वे इस तरह थे, पैट्रिक की जिम्मेदारी महाप्रसाद में जहर मिलाने की थी, जबकि जैनम का काम पैसा भी जुटाने का था। सरफराज अहमद नामके आतंकी को भीड़ वाली जगह पर गाड़ी चला कर लोगों को कुचल कर मारने के लिए कह गया था, जबकि तकी खान जो कि आइईडी बम बनाता है उसे संदिग्ध किशोर का इस्तेमाल करके आत्मघाती हमले को अंजाम देने का काम सौंपा गया था। साथ ही मोहसिन खान को मुंबई डैम और पानी की पाइप लाइन का निरिक्षण किया था। दाऊद के एक गुर्गे  मजहर शेख पर इन सभी संदिग्धों को सुरक्षित विदेश भेजने का काम सौंपा दिया गया था।


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