30 साल बाद जेल में हुई मौत का राज खुला, पूरा पुलिस डिपार्टमेंट रह गया भौंचक्का

आवेश में आकर उस पुलिस वाले ने ठक्कर से यह सारी बातें बता तो दिया लेकिन यह सब कहते हुए वो यह भूल गया कि उसकी सभी बातें ठक्कर के ऑफिस में लगे सीसीटीवी में कैद हो रही है।

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30 साल पहले एक आरोपी की जेल में मौत हो गयी थी। उस समय पुलिस ने अपनी रिपोर्ट के यह कहा था कि आरोपी के बीमार होने के कारण उसकी मौत हुई है, लेकिन अब पता चल रहा है कि दरअसल उसकी मौत जेल में पिटाई होने के कारण हुई थी। अब इस मामले की जांच फिर स शुरू हो गयी है. इस बात का खुलासा उस मामले से जुड़े एक रिटायर्ड अधिकारी ने किया है।

इस तरह खुला राज 
सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी शिकायतकर्ता राजेंद्र ठक्कर के मालाड स्थित कार्यालय में 15 अक्टूबर 2018 को पहुंचे। उनके साथ एक और पुलिस अधिकारी भी था। सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी ने ठक्कर से बात करते हुए यह बताया कि कैसे पुलिस वाले लोगों ने एक आरोपी की हत्या कर उसे बीमारी से मौत होने की कहानी गढ़ दिया था। आवेश में आकर उस पुलिस वाले ने ठक्कर से यह सारी बातें बता तो दिया लेकिन यह सब कहते हुए वो यह भूल गया कि उसकी सभी बातें ठक्कर के ऑफिस में लगे सीसीटीवी में कैद हो रही है।

इसके बाद यह विडियो वायरल हो गया, और देखते ही देखते पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।बदनामी होते देख पुलिस ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए।

क्या था मामला?
90 के दशक में संबंधित पुलिस अधिकारी ने (जो कि इस समय रिटायर्ड हो चुका है) रट्टू गोसावी नामके एक कुख्यात अपराधी को पकड़ा था। रट्टू पर चोरी सहित 27 गंभीर अपराध मामले दर्ज थे। पूछताछ के दौरान रट्टू को काफी टॉर्चर किया गया, जब उसकी हालत खराब होने लगी तो उसे गंभीर अवस्था में जे.जे अस्पताल में दाखिल कर दिया गया। जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गयी।

लेकिन संबंधित पुलिस अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट यह बताया कि आरोपी भागने की फ़िराक में पहली मंजिल से गिर कर चोटिल हो गया था, इसीलिए इलाज के लिए उसे अस्पताल में दाखिल कराया गया था। लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी। इसके बाद पुलिस ने रट्टू की फ़ाइल क्लोज कर दी थी।

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