पीटर मुखर्जी को नही मिली जमानत

मुखर्जी ने स्वास्थ के आधार पर जमानत की अर्जी बॉम्बे हाई कोर्ट में दी थी

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह पूर्व मीडिया बैरन पीटर मुखर्जी  को अपनी सौतेली बेटी शीना बोरा की हत्या के मामले में जमानत नहीं दे सकता, लेकिन जेल प्रशासन ने उसे ऑपरेशन के बाद के कार्डियक पुनर्वास सत्र के लिए ले जाने का निर्देश दिया।  



न्यायमूर्ति छागला ने आदेश में कहा कि आवेदक को एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में ऑपरेशन के बाद कार्डिएक रिहैबिलिटेशन सेशन और फिजियोथेरेपी कराने की अनुमति देना सही होगा।  अदालत ने कहा, "आवेदक को एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट द्वारा निर्धारित 26 सेशन के लिए पुलिस एस्कॉर्ट के तहत अस्पताल ले जाया जाएगा।"


 मुखर्जी ने पिछले सप्ताह उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए  मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत मांगी थी।  उनके वकील श्रीकांत शिवाडे ने तर्क दिया कि मुखर्जी को पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल दिए बना जेल भेज दिया गया था। बाईपास सर्जरी के बाद जेल को रखने के लिए उचित जगह नहीं है, हालांकि कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से मन कर दिया।



सीबीआई के वकील एजाज खान ने याचिका का विरोध किया और एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट पर भरोसा किया, जिसमें कहा गया था कि मुखर्जी को अस्पताल से छुट्टी दी जा रही थी क्योंकि वह सर्जरी से उबर चुके थे।



नवंबर 2015 में अपनी पत्नी इंद्राणी मुखर्जी की बेटी शीना बोरा की हत्या में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में   गिरफ्तारी के बाद से जेल में बंद है।  केंद्रीय जांच ब्यूरो के अनुसार, बोरा की मौत अप्रैल 2012 में हुई थी, लेकिन यह मामला अगस्त 2015 में ही सामने आया था, जब इंद्राणी मुखर्जी के पूर्व ड्राइवर श्यामवर राय ने एक अन्य मामले में गिरफ्तार होने के बाद इस मामले को सामने लाया था।


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