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पुलिस की सख्ती से परेशान हुए नागरिक, आधी रात तक हो रही है कार्रवाई

बताया जाता है कि रविवार को पुलिस ने लगभग 7075 वाहनों पर कार्रवाई की। और जब तक पुलिस सभी गाड़ियों को चेक नही कर लेती थी तब तक किसी को जाने नहीं दे रही थी।

पुलिस की सख्ती से परेशान हुए नागरिक, आधी रात तक हो रही है कार्रवाई
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वर्ली में रहने वाले निशांत सबनीस दादर स्थित अपने मां- पिताजी से मिलकर अपने घर जा रहे थे। निकलने में थोड़ी देर हो गई। रास्ते मे उन्हें पुलिस इस रोक लिया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। निशांत सबनीस ने मुंबई लाइव से बात करते हुए बताया कि, कुछ महीने पहले मेरा एक्सीडेंट हो गया था। पैर में काफी चोटें आई थीं, अब तक कुल 5 ऑपरेशन हो चुके हैं।

उन्होंने बताया कि पुलिस नियम के नाम पर लोगों के साथ दुर्व्यवहार कर रही है। उन्होंने आगे बताया कि, पुलिस ने उनकी कार जब नाकाबंदी में रुकवाई तो उन्होंने सारी बात पुलिस को बताई, और अस्पताल का सारा कागज भी दिखाया लेकिन पुलिस कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी।

निशांत ने कहा, एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते मैं पुलिस का सहयोग कर रहा था, लेकिन उन्होंने मुझे रात 2 बजे तक रुका कर रखा, जबकि कई गाड़ियों को बिना चेकिंग के जाने दे रहे थे। जबकि एक पुलिसकर्मी की वर्दी से उसका नेम प्लेट तक गायब था।

विलेपार्ले के रहने वाले नीलेश गुड्डा भी पुलिस की इसी ज्यादती का शिकार बने। उन्होंने कहा, मेरे 84 वर्षीय पिताजी बीमार हैं। उन्हें देखने के लिए मैं चर्नी रोड गया था। लेकिन वहां से लौटते हुए पुलिस ने नाकाबंदी में रोक लिया, और मेरे बताने पर भी कुछ सुनने को तैयार नहीं थे। मेरी इतनी गलती थी कि मुझे लौटने में रात हो गयी थी। मैंने अपनी गलती मानते हुए, पुलिस से सहयोग करने की भी बात कही। लेकिन बावजूद इसके उनका रवैया काफी नमरात्मक था। जबकि मेरे साथ मेरा छोटा बच्चा और पत्नी भी थी। मैंने उनसे कहा भी कि, आपको जो जुर्माना लेना है लीजिए जो चालान काटना बै कटिये लेकिन मुझे जाने दीजिए, लेकिन वे नहीं माने और रात 10 बजे से लेकर 2 बने तक अनायास ही मुझे परेशान किया।

तीसरी घटना के मुताबिक, मुलुंड की रहने वाली सुविध पिल्ले के पिताजी बीमारी के बाद से अस्पताल में दाखिल हैं। कोई देखभाल करने वाला नहीं है तो मैं उनकी देखभाल कर रही थी। कल जब मेरे पति मुझे लेने आए और हम लोग अपने घर जा रहे थे तो पुलिस ने रोक लिया। हमने सारी बात बताई बावजूद इसके वे सुनने को तैयार नहीं थे। काफी देर बाद पुलिस ने हमें छोड़ा।

दरअसल यह कोई निशांत, नीलेश या फिर सुविधा पिल्ले की ही कहानी नहीं हैं। ऐसे कई लोग हैं जो पुलिस की इस ज्यादती का शिकार हो चुके हैं। पुलिस नियम और कानून की आड़ में लोगों पर अपना धौंस जमा रही है।

आपको बता दें कि नियमों का उल्लंघन होता देख प्रशासन ने नया नियम लागू किया है कि अगर कोई अपने घर से वाहन द्वारा 2 किमी से अधिक दूरी जाता है तो उस पर कार्रवाई की जायेगी। इसका उद्देश्य लोगों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने के लिए रोकना था। लेकिन खुद पुलिस इस कानून की आड़ में लोगों को परेशान कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक बांद्रा-वर्ली सी फेस के यहां पुलिस ने आधी रात तक लोगों पर कार्रवाई की और 50 से 60 गाड़ियां जब्त की। इस दौरान लंबा जाम लगा रहा।

बताया जाता है कि रविवार को पुलिस ने लगभग 7075 वाहनों पर कार्रवाई की। और जब तक पुलिस सभी गाड़ियों को चेक नही  कर लेती थी तब तक किसी को जाने नहीं दे रही थी। इसकी वजह से लोगों को कई घंटों तक जाम में खड़ा रहना पड़ा। यह सिलसिला आधी रात तक चलता रहा, जिससे लोगों में पुलिस के खिलाफ नाराजगी दिखी।

इस बारे में मुंबई पुलिस के DCP और प्रवक्ता प्रणय अशोक का कहना है कि, रात 9 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक कर्फ्यू का आर्डर है, यह बात सभी को पता है। मेडिकल इमरजेंसी होने पर नागरिकों को उनके घर से 2 किमी जाने की छूट दी गई है। कोरोना वायरस का खतरा अभी तक टला नहीं है। यह बात आम लोगों को नहीं भूलना चाहिए। राज्य सरकार की तरफ से लोगों को आवश्यक कार्य के लिये छूट दी गई है, साथ ही कई नियमों में भी ढील दी गई है। इसके बाद भी लोग नियमों को तोड़ रहे हैं। हमारी अपील है कि लोग नियमों का पालन करें। इसलिए पुलिस कार्रवाई कर रही है।

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