लोकल ट्रेन में छूट गयी छह साल की बच्ची, उसके बाद....

अपने परिवार के साथ शिर्डी से लौट रहे ओमप्रकाश यादव ट्रेन में अपनी छह साल की बेटी लतिका को ही भूल गए, यह तब हुआ जब उनके साथ परिवार के अन्य सदस्य भी थे।

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भूलने की आदत अमूमन सभी को होती है, इसे हमारे समाज में बेहद ही हल्के तौर पर लिया जाता है। लेकिन कभी-कभी यह भूलने की आदत काफी भारी पड़ जाती है। ऐसा ही कुछ हुआ ओमप्रकश हरिपाल यादव के साथ। अपने परिवार के साथ शिर्डी से लौट रहे ओमप्रकाश यादव ट्रेन में अपनी छह साल की बेटी लतिका को ही भूल गए, यह तब हुआ जब उनके साथ परिवार के अन्य सदस्य भी थे। आख़िरकार आरपीएफ ने किसी तरह से लतिका को ढूंढ़ निकाला और उसे ओमप्रकाश यादव को सही सलामत सौंप दिया।


क्या था मामला?
डोंबिवली के रहने वाले ओमप्रकाश हरिपाल यादव अपने गुरुवार को परिवार के साथ शिर्डी दर्शन करके मुंबई लौट रहे थे। मुंबई के दादर रेलवे स्टेशन पर पहुंचते उन्हें रात हो गयी। दुग्ध विक्रेता ओमप्रकाश यादव को अपने घर पहुंचने की जल्दी थी।उन्होंने दादर से कल्याण जाने के लिए किसी तरह से अंतिम लोकल पकड़ी। थके होने के कारण परिवार के कई सदस्यों को ट्रेन में ही नींद आ गयी। ट्रेन जब कल्याण पहुंची तो परिवार के अन्य सदस्य ट्रेन से सामान लेकर उतर गए। ट्रेन से उतरने के बाद ओमप्रकाश के साले ने ओमप्रकाश से कहा कि लतिका नहीं दिख रही है? इतना सुनते ही सभी के पैरों तले जमीन खिसक गयी। ओमप्रकाश को याद आया कि वह लतिका को खिड़की के पास सोता छोड़ जल्दबाजी में उसे जगाना भूल गए और ट्रेन से उत्तर गए।


लड़की मिली सुरक्षित 

ओमप्रकाश उस प्लेटफॉर्म की तरफ दौड़ा जहां ट्रेन खड़ी थी। लेकिन तब तक ट्रेन वापस दादर की और चल दी थी। आनन-फानन में कल्याण स्टेशन मास्टर को इसकी सूचना दी गयी। कल्याण के स्टेशन मास्टर ने दादर आरपीएफ को इसकी सूचना दी। दादर के आरपीएफ पुलिस के सीनियर जांच अधिकारी सतीश मेनन की अगुवाई में एक टीम का गठन कर लतिका की तलाश शुरू की गयी। जब ट्रेन सुबह 4.45 बजे दादर स्टेशन पहुंची तो आरपीएफ ने लड़की को ट्रेन में सोते हुए पाया। आखिर आरपीएफ ने लतिका को सुरक्षित उसके माता-पिता को सौंप दिया।

लतिका को सुरक्षित देख परिवार वालों की जान में जान आई, उन्होंने आरपीएफ अधिकारियों का आभार प्रकट किया।

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