मुंबई में चप्पे-चप्पे पर CCTV, फिर भी बढ़ीं चैन स्नेचिंग की घटनाएं

इस बाबत कोई कड़ा कानून नहीं बना है। आरोपी गिरफ्तार होता है तो वह आसानी से जमानत पर छुट जाता है नहीं तो कुछ महीने जेल में रह कर बाहर निकलता है और फिर से इसी काम को करने लगता है।

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एक आरटीआई ( RTI)की रिपोर्ट के अनुसार मुंबई में चैन स्नेचिंग के मामलो में 50 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। यह जानकारी आरटीआई एक्टिविस्ट शकील अहमद द्वारा दायर किये गये एक सवाल के जवाब में आया है।

इस आरटीआई के जवाब में जो बात सामने आई है उसके मुताबिक, अगर पिछले कुछ साल में हुए चैन स्नेचिंग की घटनाओं पर नजर डाली जाए तो जनवरी 2013 से लेकर दिसंबर 2018 तक कुल 4674 मामले दर्ज किये गए। इस दौरान जितने में चैन स्नेचिंग की घटनाएं दर्ज हुई उसके मुताबिक कुल 45 करोड़ 68 लाख 50 हजार 582 रुपए के चैन उड़ाए गये, जिसमें से पुलिस ने मात्र 16करोड़ 75 लाख 46 हजार 295 रुपए के ही चैन बरामद किये यानी मात्र 37 फीसदी।

2018 में चैन स्नेचिंग की कुल 931 घटनाएं हुईं, इन चैन की कुल कीमत 7करोड़ 4 लाख 44 हजार 300 रुपए आंकी गई। जिसमें से पुलिस ने मात्र 828 मामलों की ही शिनाख्त कर पाई यानी 4करोड़ 55 लाख 401 रुपए के चैन बरामद कर पाई है।   

शकील अहमद का कहना है कि मुंबईकरों की सुरक्षा के लिए बड़े-बड़े दावे किये जाते हैं, साल 2016 में मुंबई में 949 करोड़ रुपए खर्च करके 6000 कैमरे लगाए गये हैं। इसके बावजूद अपराधियों द्वारा खुले आम चैन स्नेचिंग की घटनाओं में वृद्धि हुई है।

इसका कारण है कि इस बाबत कोई कड़ा कानून नहीं बना है। आरोपी गिरफ्तार होता है तो वह आसानी से जमानत पर छुट जाता है नहीं तो कुछ महीने जेल में रह कर बाहर निकलता है और फिर से इसी काम को करने लगता है।

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