Chhath Puja: आस्था और सियासत का मिला जुला पर्व

मुंबई में हर साल जुहू चौपाटी में लाखों की संख्या में श्रद्धालु छठी माता की पूजा करते हैं। जुहू सहित बोरिवली, और नाला सोपारा में ठाणे के कल्याण में भी बड़ी धूमधाम से छठ पूजा मनाया जाता है।

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आस्था का पर्व कहे जाने वाले छठ पूजा की तैयारियां अब शुरू हो गयी है। 4 दिन तक चलने वाले इस पर्व को लेकर नई नवेली दुल्हनों में गजब का उत्साह और जोश देखने को मिलता है। यह पर्व उत्तर भारत के राज्यों ख़ास तौर पर बिहार, झारखंड और यूपी में मनाया जाता है। जिन- जिन राज्यों में उत्तर भारतीय रहते हैं वहां भी छठ पूजा बड़ी धूमधाम से देखने मिलता है। छठ पूजा को लेकर अब आस्था कम और राजनीति अधिक देखने को मिलती है। आइये जानते हैं सबसे पहले छठ पूजा की तिथि और तारीख 

आपको बता दें कि छठ पूजा 31 अक्टूबर को नहाए खाय से शुरू होगी। व्रती महिलाएं विधि विधान से कच्चे चूल्हे पर बनाई गई गेहूं की रोटी और लौकी-चने की दाल की सब्जी को खाती हैं। एक बार आहार लेने के बाद महिलाएं अगले दिन ही खरना का प्रसाद ले सकती हैं।

छठ पर्व के दूसरे दिन यानी 1 नवंबर को खरना होता है। खरना के दिन गुड़ की खीर बनती है और कच्चे चूल्हे पर रोटियां सेंकी जाती हैं। इसी को छठ परमेश्वरी की पूजा के बाद प्रसाद के तौर पर व्रती खुद भी खाती हैं और इसे ज्यादा से ज्यादा बांटा जाता है।

2 नवंबर को यानी तीसरे दिन महिलाएं सुबह उठने के बाद नहा धोकर डाला तैयार करती हैं। इस डाले में 5 तरह के फल और नई कच्ची सब्जियों से पूजा के लिए प्रसाद के रखती हैं। दिन भर वह डाले में तमाम तरह की चीजें शामिल करती हैं और शाम हो महिलाएं सूरज डूबने से पहले नदी के घाट या तालाब किनारे पहुंच जाती हैं। जैसे ही सूरज का ढलना शुरू हो जाता महिलाएं डाले की सामग्री को चढ़ाती हैं और सूर्य की पहली पत्नी अस्ताचल की आराधना करती हैं, इस दौरान ढलते सूरज को अर्ध्य देना शुभ माना जाएगा। अस्ताचल की पूजा (सूर्यास्त का समय) 17:35:42 बजे है। रात में घर पर भर सभी महिलाएं भजन कीर्तन करती हैं। इस दिन महिलाएं कुछ भी बिना खाए पिए निर्जला व्रत करती हैं।

छठ पर्व के आखिरी दिन को व्रती महिलाएं उगते सूरज को अर्ध्य देती हैं। सूर्योदय का समय- 06:34:11 बजे होगा। आखिरी दिन वह सुबह के 3 से 4 बजे के बीच उठती हैं और पूजा की तैयारियां शुरू कर देती हैं। इस दिन व्रती उगते हुए सूरज की पहली किरण की लालिमा को अर्ध्य देती हैं। इस दिन महिलाएं सूरज उगने के आधे घंटे पहले से ही कमर तक गहरे पानी में खड़ी रहती हैं और सूरज की पहली किरण आने की प्रतीक्षा करती हैं। उगते सूर्य को प्रणाम करने यानी अर्घ्य के साथ ही छठ पर्व की पूजा समाप्त हो जाती है। इस तरह से बड़ी धूमधाम से महिलाएं पूजा कर छठ मइया से अपने और परिवार की मंगल कामना करती हुई पूजा समाप्त करती हैं।

मुंबई में हर साल जुहू चौपाटी में लाखों की संख्या में श्रद्धालु छठी माता की पूजा करते हैं। जुहू सहित बोरिवली, और नाला सोपारा में ठाणे के कल्याण में भी बड़ी धूमधाम से छठ पूजा मनाया जाता है।

जुहू बीच पर तो बाकायदा कई राजनीतिक पार्टियों के मंच सजते हैं जहां दो बात तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी आ चुके हैं। इसके अलावा कांग्रेस नेता संजय निरुपम की अगुवाई में एक 'बिहारी फ्रंट' का गठन किया गया है जो छठ पूजा करवाता है।

यहां छठ पूजा के दिन भोजपुरी अभिनेता रवि किशन, पवन सिंह और अभिनेत्री अक्षरा सिंह सहित अन्य नेता और अभिनेता भी पहुंचते हैं। यानि एक तरह से यह पूरा आकर्षण का केंद्र होता है. शायद एक वजह यह भी है कि इसी कारण हर साल यहां आने वाले लोगों की संख्या काफी बढ़ती जा रही है।

इस पर्व में बढ़ती राजनीति के दखल सेकई बार यह विवादों में भी घिर चुका है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना जैसी पार्टियां जो मराठी मुद्दे को लेकर राजनीति करती हैं वे यह कह कर आरोप लगाती हैं कि इस पर्व से उत्तर भारतीय नेता अपना शक्ति प्रदर्शन करते हैं, और वे मराठी के कल्चर को प्रभावित भी करते हैं। तमाम झंझावातों को सहते हुए छठ पर्व आज भी लोगों के लिए आस्था का प्रतीक बना हुआ है।

कुछ भी हो आस्था के इस पर्व का जितना महत्व है उससे अधिक महत्व है यह लोगों को एक साथ आने और जुड़ने का अवसर देता है. राज्यों की संस्कृति एक दूसरे के करीब आती है। जो भारत जैसे विविधता भरे देश में  अनेकता में एकता का सन्देश देती है, बशर्ते इस पर से राजनीति की काली छाया न पड़ने पाए।

 

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