virginity test: लड़कियों के 'कौमार्य' चेक करने की रोंगटे खड़े करने वाली कुरीति

आपको बता दें कि इस तरह का ‘टेस्ट’ भारत के कुछ राज्यों में ही नहीं बल्कि कई देशो तक में फैला हुआ है। इनमे रोम, चीन, सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्जिया, साउथ अफ्रीका जैसे देश हैं।

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सीता (नाम बलदा हुआ) अभी 15 साल की तो है, पढ़ाई-लिखाई और खेल में भी अपने क्लास में फर्स्ट आती है। लेकिन उसका परिवार एक श्राप से अभिशप्त है और वह है गरीबी। इसी गरीबी के कारण सीता के घर वालों ने उसकी शादी तय कर दी है। सीता आज खुश है क्योंकि उसकी शादी होने वाली है। हर मां की तरह सीता की मां ने भी सीता को सुखी घर गृहस्थी और प्यार करने वाले एक पति का सपना दिखाया है। सीता को शादी का मतलब भी नहीं पता है लेकिन वह खुश है क्योंकि उसकी शादी हो रही है।

शादी हो जाने पर सीता जब ससुराल पहुंची तो उसकी सास ने उसके कान में कुछ फुसफुसाया, जिसे सीता  नहीं समझ सकी लेकिन जब उसने अपने पति से पूछा तो उसके पति ने बताया कि उसे 'पवित्रता' की परीक्षा देनी होगी। जब इतने पर भी सीता कुछ नहीं समझी तो पति ने आगे कहा कि अगर संभोग के दौरान तुम्हारे प्राइवेट पार्ट से खून नहीं आया तो इसका मतलब होगा कि तुम चरित्रहीन हो तुम और लोगों के साथ सो चुकी हो। सीता को यह बात अजीब लगी उसने अपनी पति से कहा कि उसके प्राइवेट पार्ट से तो उस समय खून निकला था जब वह एक बार खेल रही थी, उस समय खून निकला था जब वह एक बार साइकिल चलाते समय गिर गयी थी, उस समय खून निकला था जब वह स्कूल में दौड़ने की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था, लेकिन इस बार खून नहीं निकला तो क्या? पति की इस बात से सीता सहम गयी थी, उसके मन में अनेक सवाल उमड़ रहे थे कि अगर वह ‘पवित्र’ साबित नहीं हुई तो क्या होगा?


खैर, सुबह हुई...सीता और उसका पति सोये ही थे तभी घर वालों ने दरवाजा खटखटाया, सीता हकबका कर उठ गयी और दरवाजा खोला। सामने पूरा परिवार खड़ा था। सभी उसे पीछे धकेलते हुए बेड के पास पहुंचे, बेड पर बिछाए गये सफ़ेद चादर को चेक किया गया लेकिन चादर सफ़ेद निकली, कहीं भी लाल धब्बे का कोई निशान नहीं था। सीता आशंकित नजरों से सभी को देख रही थी। सीता के ससुर ने सीता के पति को कोने में ले जाकर फुसफुसाना शुरू कर दिया तो सीता को उसकी सास और ननद ने दुसरे कमरे में ले जाकर पूछना शुरू कर दिया कि शादी से पहले उसके कितने लोगों के साथ संबंध थे, वह कितने लोगों के साथ सो चुकी है? इस सब बातों का सीता के पास को जवाब नहीं था। वह नहीं समझ पा रही थी कि वह इन लोगों को किस तरह का जवाब दें कैसे समझाएं। उसने इस बारे में अपने पति से बात की लेकिन पति ने सीधे उसके चरित्र परसवाल उठाते हुए बदचलन करार दे दिया।

दो घंटे बाद सीता के साथ वह हो रहा था उसकी उसने कभी कल्पना तक नहीं की थी, उसका सामान पैक करके उसे वापस उसके मां-बाप के घर भेजा जा रहा था। शादी के अगले दिन वापस लौटने के बाद गांव में हाहाकार नच गया। सीता के मां-बाप, भाई-बहन से लेकर सारे गांव वाले भी सीता को शक की नजरों से देख रहे थे, वे लड़कियां भी जिनके साथ सीता बचपन से खेलते आई है, वे बुजुर्ग भी जिनकी गोद में सीता खेल कर बड़ी हुई है। मां-बाप द्वारा लाख दुहाई देने के बाद सीता के ससुराल वाले सीता को छोड़ कर चले गये। तब से आज 5 साल हो गये हैं सीता अभी तक अपने घर पर ही है। सीता की छोटी बहन भी है लेकिन सीता के ‘अपवित्र’ साबित होने के बाद कोई भी सीता की छोटी बहन से शादी नहीं करना चाहता।  


‘वर्जिनिटी टेस्ट’ के संदर्भ में लिखी गयी यह बातें आपको भले ही कहानी लगे लेकिन यह कहानी नहीं बल्कि महाराष्ट्र के एक पिछड़ी जाति में पैदा होने वाली एक लड़की की कहानी है। इस लड़की का नाम जानबूझ कर सीता बताया गया है क्योंकि हमारे समाज में ‘पवित्रता’ का इम्तिहान केवल ‘सीता’ ही देती है। 

यह तो एक बानगी है ऐसे कई उदाहरण हैं...कई मामलों में लड़कियों कि शादी के अगले दिन ही तलाक देने या फिर ससुराल में इनका उत्पीड़न करने तक के मामले सामने आये हैं। वैसे आपको बता दें कि इस तरह का ‘टेस्ट’ भारत के कुछ राज्यों में ही नहीं बल्कि कई देशो तक में फैला हुआ है। इनमे रोम, चीन, सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्जिया, साउथ अफ्रीका जैसे देश हैं।

अभी हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ को दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल करने का निर्णय लिया है। मतलब किसी भी महिला को ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ या कौमार्य परीक्षण के लिए मजबूर किए जाने पर दंडनीय कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।     

सवाल उठता है कि यह कानून इतना देरी से क्यों आया? आज जब देश मंगल गृह पर जाने की योजना बना रहा है, देश विश्व की छठवीं सबसे बड़ी इकॉनमी बन गया है लेकिन आज भी भारत के अनेक राज्यों में रहने वाली कुछ जातियों में इस तरह की प्रथाओं का पालन किया जाता है। जैसे महाराष्ट्रा की घुमंतू कंजारभाट जाति।   


दुर्भाग्य की बात यह है कि इस जाति की महिलाएं अभी भी इस कुरीति का समर्थन करती हैं। उन्हें लगता है कि लड़कियां जिस तरह से भगवान देता है उन्हें शादी से पहले तक वैसे ही रहना चाहिए।

‘जब मैंने यह टेस्ट पास किया था तो मेरे मां-बाप सहित समाज को भी काफी ख़ुशी हुई थी। मेरे मां-बाप को मुझ पर गर्व हुआ, और अब मैं भी यही चाहती हूं कि मेरी बेटी भी इस टेस्ट को पास करे- एक महिला’


इसी समाज के एक पुरुष का कहना है कि यह एक प्रथा है जो कई सालों से चली आ रही है. हमारे दादाओं ने इस निभाया, मेरी मां इसे निभाया और मनती पत्नी ने भी इस टेस्ट को पूरा किया और अब मैं यह चाहता हूं कि मेरी  बेटी भी इस टेस्ट को पूरा करे।

वैसे आपको बता दें कि कंजारभाट जाति के कुछ पढ़े लिखे युवा अब इस तथाकथित ‘पवित्रता’ के खिलाफ STOP V RITUAL’ नाम से अभियान चला रहे हैं। इन युवाओं का कहना है कि यह एक ऐसी कुरीति है जिसे जबरन थोपा गया है, जिसका खामियाजा महिलाओं को ही भुगतना पड़ता है, क्योंकि पुरुषों की शादी तो हो जाती है लेकिन एक बार टेस्ट में फेल हो जाने के बाद महिलाओं के लिए मुसीबत खड़ी हो जाती है।

इनका यह भी कहना है कि यह टेस्ट केवल महिलाओं के लिए ही क्यों है? पुरुषों के लिए क्यों नहीं, वे कौन से दूध के धुले होते हैं। क्या उनका टेस्ट नहीं होना चाहिए?

उम्मीद की जा रही है कि अब सरकार के कानून के बाद ऐसी कुरीतियों पर रोक लगेगी। लेकिन असली सवाल अभी भी जस का तस है कि क्या कानून बनाने से यह समाज वर्जिनिटी को लेकर वास्तव में अपनी सोच बदल पाएगा?

(नोट : यह लेख विभिन्न स्रोतों से जुटाई गयी जानकारियों पर आधारित है।)

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