अधिक पैसे लेनेवाले चिकित्सा संस्थानों पर सरकार हुई सख्त

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    अधिक पैसे लेनेवाले चिकित्सा संस्थानों पर सरकार हुई सख्त
    मुंबई  -  

    राज्य सरकार, फीस विनियामक प्राधिकरण (एफआरए) द्वारा निर्धारित राशि से मैनेजमेंट कोटा में अधिक पैसे लेनेवाले चिकित्सा संस्थानों पर अब कार्रवाई के मन में दिख रही है। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान राज्य निदेशालय (डीएमईआर) के निर्देशक प्रवीण शिंगहर ने कहा की ऐसे मामले में वह ना सिर्फ एडमिशन रद्द करेंगे बल्की स्वास्थ्य विज्ञान अधिनियम, 1998 के तहत कार्रवाई भी करेंगे। निर्णय स्नातकोत्तर और स्नातक प्रवेश दोनों के लिए मान्य है।

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    साथ में चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान राज्य निदेशालय की ओर से यह भी आदेश दिए गए है की जब तक मेडिकल संस्थान अपनी फीस नहीं घोषित करते हैं, तब तक छात्रों के प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। उम्मीदवारों के लाभ के लिए फीस डीएमईआर की वेबसाइट पर भी दिखाई जानी चाहिए।

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    राज्य कोटा फीस जैसा कि शुल्क विनियामक प्राधिकरण द्वारा तय किया गया है , की सीमा 8 लाख से लेकर 25 लाख तक है। लेकिन कई कॉलेज मेडिकल कॉलेजो में एनआरआई कोटा के लिए 75 लाख रुपये तक फिस लेते है। पुणे में एस के नवले मेडिकल यूनिवर्सिटी में मेरिट कोटा छात्रों को 9 लाख रुपये की फिस देनी होती है तो वहीं प्रबंधन कोटेशन के तहत 95 लाख रुपये तक की फइस ली जाती है। तो वही एसके सोमैया कॉलेज 55 लाख रुपये तक फिस ली जाती है।

    सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले के अनुसार निजी और समनुदानित कॉलेजों को क्रॉस सब्सिडी मॉडल अपनाने की अनुमति दी जाती है। इस मामले में संस्थान एनआरआई कोटा में सामान्य छात्रों के फिस से पाँच गुना चार्ज कर सकते हैं।
    वर्तमान में, एफआरए मेरिट कोटा छात्रों के लिए फिस का फैसला करती है।


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