SC ने हाई कोर्ट का निर्णय रखा बरकरार, कोटा घटने से नाराज हुए छात्र


SC ने हाई कोर्ट का निर्णय रखा बरकरार, कोटा घटने से नाराज हुए छात्र
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सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस निर्णय को बरकरार रखा है जिसके अंतर्गत हाई कोर्ट ने कोटा वाले छात्रों को का कोटा ओपन कैटगरी में शामिल करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से अब कोटा वाले छात्र आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि उन्हें मुंबई के अच्छे कॉलेज में एडमिशन नहीं मिलेगा।


क्या है मामला?
मुंबई विश्वविद्यालय से कुल 225 अल्पसंख्यक कॉलेज जुड़े हैं। इन कॉलेजों में 50 प्रतिशत सीट अल्पसंख्यक और इन कॉलेजों के प्रबंधन के लिए आरक्षित रखा गया हैं। जबकि शेष 50% कोटा में कोटा वाले छात्रों और दिव्यांग छात्रों को शामिल किया गया है।

विरोध में दायर की गयी याचिका 
लेकिन मुंबई विश्वविद्यालय के इस फैसले का विरोध करते हुए साल 2011 में सेंट जेवियर्स कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल ने उच्च न्यायालय में एक का दायर की। इस याचिका पर कोर्ट ने 10 अक्टूबर को 2017 को सुनवाई करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक कॉलेजों में आने वाले शैक्षणिक वर्ष से कोटा वाले छात्रों के लिए आरक्षण नहीं रहेगा साथ ही उच्च न्यायालय ने इन सीटों को ओपन कैटगरी में देने का फैसला दिया था।

 छात्रों ने किया आंदोलन 
अदालत के इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय से संबंधित अल्पसंख्यक कॉलेजों ने इस साल से इस निर्णय को लागू करते हुए पहली मेरिट लिस्ट जारी की। इस मेरिट लिस्ट में हजारों कोटा वाले छात्रों को मुंबई के कॉलेजों में प्रवेश के लिए नाम नहीं था जिससे छात्र संगठनों ने भी आंदोलन का आयोजन किया।

राज्य सरकार हाई कोर्ट के खिलाफ की अपील 
आंदोलन को देखते हुए राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका दायर करने के बाद डिग्री कोर्स की दूसरी मेरिट लिस्ट जारी नहीं की गयी। अब छात्र और उनके माता-पिता ने आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि इस साल भी उनके बच्चों को कॉलेजों में प्रवेश नहीं मिलेगा ।

SC ने बरकरार रखा निर्णय 
अब इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखते हुए कोटा वाले छात्रों के कोटा को ओपन कैटगरी में दिए जाने का निर्णय दिया है।

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