प्रिंसिपल का तुगलकी फरमान, परीक्षा के दौरान पेशाब करने की भी अनुमति नहीं, छात्रों में रोष


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परीक्षा के दौरान अकसर कपड़े उतरवा कर चेकिंग करने, महिलाओं के कंगन, चूड़ी, मंगलसुत्र तक उतरवा देने की खबरें तो आती रहती है, लेकिन मुंबई से अब एक नया मामला सामने आया है, जिसके सामने हिटलरशाही भी फेल है। इस फैसले से छात्रों की स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ सकता है। दरअसल मुंबई में चल रही लॉ की परीक्षा दे दौरान छात्र- छात्राओं को पेशाब करने की भी अनुमति नहीं दी गयी। होश उड़ा देने वाला यह मामला मालाड के एक लॉ कॉलेज का है। अब इस फैसले के खिलाफ स्टूडेंट लॉ काउंसिल विरोध प्रदर्शन कर कॉलेज के प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रहा है।

प्रिंसिपल का तुगलकी फरमान
गुरूवार 3 जनवरी से लॉ का सेमेस्टर 5 का एग्जाम चालू है। इस परीक्षा के लिए छात्रों का सेंटर कई कॉलेजों में बनाया गया है। इन्ही में से एक है मालाड पश्चिम में स्थित मालाड कांदिवली एजुकेशन सोसायटी लॉ कॉलेज। बताया जाता है कि इस कॉलेज में सोमवार 7 जनवरी के दिन सुबह 10:30 बजे से 1:30 बजे की परीक्षा होनी थी। परीक्षा शुरू होने के पहले कॉलेज की प्रिंसिपल वंदना दुबे ने स्कुल में यह तुगलकी फरमान जारी करवा दिया कि जिस छात्र को अभी से ही वाशरूम आना जाना है तो वह चला जाएं क्योंकि परीक्षा चालू होने के बाद किसी को पेशाब करने की भी अनुमति नहीं दी जाएगी।

दिया यूनिवर्सिटी का झूठा हवाला 

जब कॉलेज के छात्रों के इस सख्ती का विरोध किया तो प्रिंसिपल मैडम ने अपना पल्ला छुडाते हुए कहा कि यह नियम मुंबई युनिवार्सिटी ने लागू किया है, जब छात्रों के नियम कि कॉपी मांगी तो प्रिंसिपल महोदया बगले झांकने लगी। यही नहीं हद तो तब तो गयी जब प्रिंसिपल महोदय ने बड़े ही आवेश में आकर कहा कि यह मेरा कॉलेज है और यहां मेरा ही कानून चलता है।

छात्राएं रोते हुए पहुंची घर 
चौंकाने वाली बात यह है कि कई छात्राओं ने प्रिंसिपल से पीरियड आने की बात कह कर उन्हें वाशरूम जाने की अनुमति मांगी लेकिन प्रिंसिपल महोदया ने उसे भी इनकार कर दिया, बगैर यह जाने की यह स्वास्थ्य के साथ रिस्की हो सकता है। इस मामले के बाद तो कई छात्राएं रोते हुए अपने घर गयीं।

MU ने किया इनकार 
जब इस नियम के बारे में अधिक जानकारी जुटाने के लिए मुंबई लाइव ने MU के परीक्षा संचालक डॉ. अर्जुन घातुले से पूछा तो उन्होने ऐसी किसी भी नियम कानून लागू होने से इनकार कर दिया। और कहा कि परीक्षा के दौरान कोई भी छात्र अपने टीचर से अनुमति लेकर वाशरूम जा सकता है। इस मामले में उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और उचित कार्रवाई भी कि जाएगी।

परीक्षा क दौरान छात्रों को पेशाब जाने से रोकना यह काफी दुःख भारी बात है। हमारी मांग है इस मामले में MU प्रशासन दखल देते हुए प्रिंसिपल को निलंबित कर कार्रवाई करे।- सचिन पवार, अध्यक्ष, स्टुंडट लॉ काऊन्सिल

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