मुबारकां फिल्म रिव्यूः कन्फ्यूजन पर बोरिंग नहीं, कॉमेडी पर अश्लील नहीं!

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    मुबारकां फिल्म रिव्यूः कन्फ्यूजन पर बोरिंग नहीं, कॉमेडी पर अश्लील नहीं!
    मुंबई  -  

    फिल्म ‘मुबारकां’ लंदन में शानदार सफर से शुरु होती है। संजीव कपूर अपने जुड़वा बच्चों को कार में बैठाकर खुशी खुशी पत्नी के साथ कहीं जा रहे हैं। बच्चे क्यूट स्माइल दे रहे हैं, पर अंगले ही पल यह शानदार सफर मातम में तब्दील हो जाता है। कार का एक्सीडेंट हो जाता है। और इस एक्सीडेंट में संजीव कपूर और उनकी पत्नी की मौत हो जाती है, पर दोनों बच्चे बच जाते हैं। इन दोनों जुड़वा बच्चों करण और चरण को संभालने का जिम्मा उठाते हैं उनके चाचा करतार सिंह (अनिल कपूर)। लेकिन वे एक दिन भी इन बच्चों को नहीं संभाल पाते। लगे हाथ वे करण को उसकी बुआ (रत्ना पाठक शाह) को दे देते हैं जो लंदन में रहती हैं, और चरण को उसके ताऊ बलदेव सिंह (पवन मल्होत्रा) के पास भेज देते हैं जो पंजाब में रहते हैं। और इस तरह से ये दोनों सगे भाई पल भर में कजिन बन जाते हैं। रिश्तों की कहानी शायद आपको तत्काल समझ में ना आए पर कोई बात नहीं फिल्म थोड़े समय तक देखेंगे तो समझ में आ ही जाएगा।

    कहानी में मोड़ तब आता है जब करण (अर्जुन कपूर) और चरण (अर्जुन कपूर) के पैरेंट्स इनकी शादी की बात चलाते हैं। करण की पहले से गर्लफ्रैंड स्वीटी (इलियाना डीक्रूड) रहती है। जिसके साथ पठ्ठा दो साल से है। जब तक वह हिम्मत करके शादी के लिए घर में बात करता स्वीटी अपने अंदाज में ही करण की मां से मिल लेती है। इस हादसे के बाद करण कभी मां से बात करने के लिए हिम्मत ही नहीं जुटा पाता। वहीं चरण शांत स्वभाव का बंदा है पर टाका नफीजा (नेहा शर्मा) से भिड़ा लेता है। वह अच्छे खासे उर्दू शब्द बोलना भी सीख  जाता है पर बलदेव सिंह यानी पापा से बाताने कि हिम्मत कभी नहीं जुटा पाता। क्योंकि उसे पता है कि बलदेव सिंह को जब मुगलई डिश पसंद नहीं है तो मुगलई लड़की कैसे पसंद आएगी।

    चरण जब पापा के साथ लंदन लड़की देखने जाता है। लड़की बिंकल (अथिया शेट्टी) होती है। पर वह शादी नफीजा से करना चाहता है। इसलिए बचने के लिए चाचा करतार सिंह का सहारा लेता है। और यहीं से फिल्म में कॉमेडी और कन्फ्यूजन की भरमार होती है। अब इस कन्फ्यूजन के बीच आखिर में किसकी किससे शादी हो पाती है इसके लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

    अनीस बज्मी कमाल के डायरेक्टर हैं, उन्होंने बिना किसी डबल मीनिंग वाले शब्दों का इस्तेमाल किए लोगों को ठहाका लगाने पर मजबूर कर दिया। साथ ही कमाल के लोकेशन को उन्होंने ‘मुबारकां’ का हिस्सा बनाया है। यह एक गजब की फैमिली एंटरटेनिंग फिल्म है।

    अनिल कपूर (करतार सिंह) और पवन मल्होत्रा (बलदेव सिंह) वैसे तो सबको पता है कि मझे हुए कलाकार हैं पर इस फिल्म में तो समझों जान ही फूंक दी है। कहीं भी ओवर एक्टिंग नजर नहीं आती। अर्जुन कपूर की एक्टिंग में निखार देखने को मिला है। अर्जुन ने चरण का शांत स्वभाव वाला किरदार बाखूबी निभाया है। इलियाना भी गजब रही हैं।

    भारतीय फिल्मों में म्यूजिक को खास जगह दी जाती है, ऊपर से पंजाबी वाला तड़का हो तब तो बात ही अलग हो जाती है। सो इस फिल्म का म्यूजिक भी जबर्दस्त है। 


    काफी वक्त के बाद साफ सुथरी कॉमेडी फिल्म आई है। अगर आप को काफी वक्त बीत गया है फैमिली के साथ ठहाके लगाने का मौका नहीं मिला है तो बिना देरी किए ‘मुबारकां’ देख कर आएं। 


    मैं ‘मुबारकां’ को 3 स्टार देता हूं।  


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