सेव स्पैरो

 Pali Hill
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मुंबई – छोटी-छोटी, सुंदर सी फुदकती फुर्तीली गौरैया को देखकर शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दिन ऐसा भी आएगा कि गौरैया नाम की यह चिड़िया हमारे घरों को छोड़कर चली जाएगी। सवेरा आज भी होता है लेकिन गौरैया हमारी खिड़कियों पर दस्तक नहीं देती। लुप्त होती पक्षियों की इस प्रजाति को सबसे अधिक खतरा पतंगबाजी से है। मकरसंक्रांति के अवसर पर पतंगबाजी करना काफी पुरानी परंपरा है। यह परंपरा भारत के कई राज्यों में काफी धूमधाम से मनाई जाती है। पतंगबाजी में उपयोग होने वाले धारदार मांजे इन गौरैया पक्षी के जान के दुश्मन बने हुए हैं। इस धारदार मांजे में फंस कर कई पक्षी घायल हो जाते हैं कईयों की तो मौत हो जाती है। शहरों में बढ़ रहे प्रदूषण के कारण एक तो वैसे ही गौरैया अब लुप्तप्राय सी हो गयी है। इसीलिए सरकार सहित हर नागरिक का कर्तव्य है कि गौरैया के संरक्षण में कोई न कोई कदम उठाए। इसी कड़ी में ‘स्पैरो शेल्टर’ संस्था के अध्यक्ष प्रमोद माने ने ‘सेव स्पैरो’ अभियान की शुरुआत की है। उनका कहना है कि मकरसंक्रांति के अवसर पर तील-गुड़ बांट कर खुशियां मनानी चाहिए ना की पतंग उड़ा कर। माने ने एक हेल्प नंबर जारी कर लोगों से अपील की है कि अगर कही कोई गौरैया जख्मी अवस्था में नजर आती है तो तत्काल 9867633355 नंबर पर सम्पर्क करें।  

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