प्लास्टिक की थैलियां मौत और बाढ़ की निशानी!

 Mumbai
प्लास्टिक की थैलियां मौत और बाढ़ की निशानी!

26 जुलाई 2005 की काली तारीख हर मुंबईकर के जहन में आज भी जिंदा है। भला कोई भूल भी कैसे सकता है, 26 जुलाई की बाढ़ ने लोगों का संसार ही उजाड़ दिया था। इस त्रासदी में किसी का बेटा, किसी की बेटी, किसी की मां, किसी के पिता, किसी के भाई, किसी की बहन ने जान गंवाई थी। 26 जुलाई की दोपहर 2 बजे से दूसरे दिन 27 जुलाई सुबह के 8.30 बजे तक मुंबई पानी में तैर रही थी। इस हादसे में मुंबई और मुंबई से सटे शहरों के लगभग 1100 लोग बली चढ़े थे, तो वहीं करोड़ों के राजस्व का भी नुकसान हुआ था। जाववर भी बड़ी संख्या में मरे और लोगों के आशियाना भी बह गए। जब भी तेज बारिश होती है मुंबईकर इस डर से सहर जाते हैं कि कहीं फिरसे 26 जुलाई जैसी भीषण बाढ़ ना आ जाए।


बाढ़ के लिए जिम्मेदार प्लास्टिक


बाढ़ का बड़ा कारण शहर से बारिश के पानी का बाहर ना निकलना। और इस पानी को बाहर जाने से रोका रखा था प्लास्टिक की थैलियों ने जिसे बीएमसी ने भी माना था और इस हादसे के बाद शहर में 50 माइक्रॉन से कम पतली प्लास्टिक की थैलियों को बैन कर दिया था। साथ ही सरकार ने दुकानदारों और जनता से अपील की थी कि पेपर और कपड़े के बैग का इस्तेमाल करें।  


प्लास्टिक की थैली का कारोबार

पर आपको क्या लगता है आज प्लास्टिक की थैलियों का इस्तेमाल बंद हो गया है? हम पेपर और कपड़े से बने बैग का इस्तेमाल कर रहे हैं? सच्चाई यह है कि पेपर और कपड़े से बने बैग का इस्तेमाल करने वाला तबका काफी कम है। आप खुद से सोचिए आप सब्जी लेने जाते हैं तो क्या खुद का बैग साथ में लेकर जाते हैं? या फिर प्लास्टिक की थैली का विरोध करते हुए कागज और कपड़े से बने बैग की मांग करते हैं? यह आंकड़ा बहुत ही कम होगा जो ऐसा करता होगा, नहीं तो ज्यादातर लोग प्लास्टिक की थैली में ही सब्जी और अन्य जरूरत की चीजें लेकर आते हैं।

नाम ना बताने कि शर्त पर दादर के एक सब्जीनवाले ने बताया, ग्राहक सब्जी लेने के लिए खुद का थैला लेकर नहीं आते हैं। अगर उन्हें हमने थैली नहीं दी तो वे फिर कहीं और से सब्जी खरीदते हैं। अब अपना नुकसान कौन करना चाहेगा? इसलिए हम उन्हें थैली में सब्जी देते हैं।  

 यह देखकर तो यही लग रहा है कि कहीं ना कहीं हम भी बाढ़ और बीमार्यों को बुलावा दे रहे हैं। हालांकि इसके लिए अकेले हम बस जिम्मेदर नहीं हैं। इसके लिए सरकार भी जिम्मेदार है। आखिर सरकार इन प्लास्टिक की थैलियों पर कड़ा कदम क्यों नहीं उठा रही है? जो थैलियां बाढ़ को बुलावा दे सकती हैं, उन्हें हल्के में तो नहीं लिया जाना चाहिए। ऐसे कारखानों को ही बंद करे देना चाहिए।


प्लास्टिक की थैलियों की यात्रा

प्लास्टिक एक ऐसी चीज है जिसे इंसान ने बनाया तो है पर खतम नहीं कर पा रहा है। सबसे ज्यादा मुंबई के गटर प्लास्टिक की थैलियां की वजह से ब्लॉक होते हैं। और जो थैलियां समुद्र में पहुंचती हैं, उन्हें समुद्र किनारे में लगा देता है और इन थैलियों में जमा कीचड़ मच्छर व तरह तरह के कीड़ों को पैदा करता है। जो बीमारियों को बुलावा देते हैं।


जानवरों के लिए जहर है प्लास्टिक

इसके अलावा प्लास्टिक गाय भैस जैसे जानवरों के लिए भी बेहद खतरनाक है। प्लास्टिक खाने की वजह से बड़ी संख्या में जानवरों की मौत हो रही है। प्लास्टिक खाने की वजह से हो रही गायों की मौत को रोकने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने भी अपने राज्य में प्लास्टिक की थैलियों को बैन किया हुआ है। पर सवाल वही है कि कहीं मुंबई जैसे ही हालात तो नहीं बनेंगे कि बैन होने के बावजूद मुंबई के बीच के किनारे प्लास्टिक की थैलियों से पटे रहते हैं।    


अपील

इस संबंध में हमने बीएमसी के कुछ अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की पर वे कुछ भी बोलने से आनाकानी करते नजर आए। हम यही उम्मीद करते हैं कि सरकार प्लास्टिक की थैलियों पर जल्द से जल्द कठोर कदम उठाए। ताकि दोबारा 26 जुलाई जैसी नौबत मुंबईकरों के सामने ना आ सके।


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