आरे में कटे हुए पेड़ो को श्रद्धाजंली

बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही ज्यादातार पेड़ों की कटाई कर दी गई।

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जोरू बाथेना और स्टालिन दयानंद के साथ हजारों कार्यकर्ता पिछले चार सालों से मेट्रो 3 (कोलाबा-बांद्रा-सीपेज़) कार शेड के निर्माण के लिए आरे कॉलोनी में 2700 पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे हैं। जैसे ही बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि आरे को अब जंगल घोषित नहीं किया जा सकता है और इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होनी चाहिए, मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMRCL) के अधिकारियों ने उस  रात 9 बजे पेड़ों को काटना शुरू कर दिया।

उस दिन अधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच भारी तनाव और झगड़ा हुआ क्योंकि लोगों को क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी। अंत में, सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष पीठ ने कहा कि पेड़ों की कटाई को अगली सुनवाई तक रोक दिया जाना चाहिए, जो 21 अक्टूबर को होगी।

हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही ज्यादातार पेड़ों की कटाई कर दी गई। पेड़ों को श्रद्धांजलि देने के लिए, आदिवासी (आदिवासी) समुदाय आरे कॉलोनी के पास एकत्र हुए। उन्हें मोमबत्तियाँ और तख्तियाँ पकड़कर कटे हुए पेड़ो को श्रद्धांजली दी।  


 

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