टेट्रा पैक लाओ, बेंच-स्कूल डेस्क ले जाओ!

आज के समय में दूध, दही, छास और जूस आदि की पैकिंग के लिए ज्यादा से ज्यादा टेट्रा पैक का उपयोग किया जाता है। दूध, दही, छास और जूस हर घर में हर दिन उपयोग में आने वाली चीजें हैं, इसीलिए हर घर से हर दिन टेट्रा पैक निकलते हैं। पर इनका सही उपयोग नहीं होता और टेट्रा पैक कचरे के साथ डंपिंग ग्राउंड पहुंच जाते हैं। पर इसके उलट अगर आप इन टेट्रा पैक को एकत्र करते हैं तो इसके बदले में आप डंपिंग ग्राउंड के ढेर को तो कम करेंगे ही साथ ही आपको इसके बदले में बेंच और अन्य फर्नीचर मिल सकती हैं।

जी हां आपको यकीन नहीं हो रहा होगा पर यह सच है। टेट्रा पैक से बेंच आदि बनाए जा रहे हैं। एक बेंच के लिए लगभग 2 से ढाई हजार टेट्रा पैक की जरूरत होती है। इसके बनाने में प्लास्टिक का भी उपयोग होता है, जिसकी वजह से इसे बारिश में भी कोई नुकसान नहीं होता और यह टेट्रा पैक का बेंच आपके गार्डन की सालो साल शान बनी रहेगी।  

अगर आपको अब भी भरोसा नहीं हो रहा है तो आप कोलाबा स्थित सागर उपवन गार्डन का दोरा कर सकते हैं। इस गार्डन में टेट्रा पैक से बने चार बेंच बैठाए गए हैं। यहां पर टेट्रा पैक से बनी बेंच को बैठाने के लिए कोलाबा निवासी रेणू कपूर ने पहल की थी।


मोनीषा द्वारा शुरु किया गया यह उपक्रम बहुत ही अच्छा और कौतुकास्पद है। इसके बारे में जानकारी एकत्र करने के मकसद से मैं उनके प्रशिक्षण शिविर में गई थी। उस समय मोनीषा अनयूज्ड चीजों से ज्वेलरी बनाने का गुर लोगों को शिखा रही थीं। उन्होंने शिविर में मुझे पेपरशीट दी जोकि टेट्रा पैक से बनी थी। मुझे यह देखकर आश्चर्य हुआ। उसके बाद मैंने इस ओर अपने कदम बढ़ाने चाहे। हमारी सोसायटी में शिविर आयोजित किया गया। रहिवासियों ने इसकी उपयोगिता समझी और टेट्रा पैक जमा करने के लिए एक बॉक्स सोसायटी में बैठाया गया। तीन सालों में इस बॉक्स में लगभग 14 हजार टेट्रा पैक जमा हुए। इस टेट्रा पैक से बनाई गई चार बेंच सागर उपवन गार्डन में लगाई गई हैं।

-रेणू कपूर, रहिवासी, कोलाबा    

मुंबई शहर के कचरा से डंपिंग ग्राऊंड पहाड़ की तरह बढ़ते जा रहे हैं। इस कचरा में कुछ ऐसी भी वस्तुएं भी हैं जिनको रिसयाकल किया जा सकता है, जैसे कपड़ा, प्लास्टिक, कागज, पुठ्ठे आदि। इन कचरा के ढेरों को कम करने के मकसद से एक समाजिक संस्था ने 'आरयूआर' मतलब 'आर यू रियूजिंग एंड रिसायकलिंग' नाम की पहल की है। यह संस्था टेट्रा पैक से बेंचेस, स्कूल डेस्क और अन्य फर्नीचर बनाने का काम कर रही है। 'आरयूआर' की संस्थापिका मोनीषा नरके हैं। इस गो ग्रीन की पहल को लेकर 'आरयूआर' का नाम 'लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड' में भी दर्ज हो चुका है।


कचरे को दोबारा कैसे उपयोग किया जाए इसका मैंने अध्ययन किया है। उसी दौरान मेरा ध्यान टेट्रा पैक पर गया, क्योंकि टेट्रा पैक को पूरी तरह से रिसायकल किया जा सकता है। इसलिए हमने टेट्रा पैक से बेंचेस, स्कूल डेस्क बनाने का निर्णय लिया। पर लोग इन टेट्रा पैक को जमा कैस करें? लोगों से इसके लिए अपील करना एक तरह का टास्क था। मैंने इसकी शुरुआत माहिम स्थित अपनी सोसायटी से की। लोगों का अच्छा प्रतिसाद देख हमने इसे बड़ा रूप देते हुए पालघर में शिफ्ट किया। अब वहीं टेट्रा पैक भेजा जाता है और वहां से यह बेंच और स्कूल डेस्क में तब्दील होकर आ जाता है।

-मोनीषा नरके, संस्थापिका, आरयूआर


मोनीषा के प्रोजेक्ट को बढ़िया प्रतिसाद मिलता देख 'सहकारी भंडार' और  'रिलायन्स फ्रेश' भी इस मुहिम में शामिल हुए हैं। सहकारी भंडार की तरफ से 55 दुकानों में टेट्रा पैक जमा कराने के लिए बॉक्स लगाए गए हैं, ताकि लोग टेट्रा पैक फेंकने की जगह बॉक्स में डाल सकें।


7-8 साल पहले हमने इस कार्य की शुरुआत की थी। शुरुआत में 100 टेट्रा पैक जमा हुए थे। पर अब यह संख्या लाखों में तब्दील हो गई है। लगभग 30 स्कूलों में टेट्रा पैक से बने स्कूल डेस्क हमने दान किए हैं। टेट्रा पैक से सिर्फ फर्नीचर ही नहीं बल्कि नोटबुक, पेपर रोल जैसी वस्तुएं भी बनाई जा सकती हैं। सहकारी भंडार में जमा हुए टेट्रा पैक को बचत गट की महिलाएं पालघर में पहुंचाने का काम करती हैं। जिसके चलते इन महिलाओं की आमदानी भी बढ़ गई है। पर यह सब ‘आरयूआर’ के बिना संभव नहीं था।

-विनय अध्ये, बिजनेस हेड



ऐसे टेट्रा पैक से बनती हैं बेंच

हर दूसरे दिन हमारे पास लाखों टेट्रा पैक कार्टन्स जमा होते हैं। सबसे पहले टेट्रा पैक कार्टन्स को ग्राइंडिंग मशीन द्वारा बारीक किया जाता है। उसके बाद प्रेस सेक्शन में एक स्टील की सीट पर टेट्रा पैक से बना भूसा डाला जाता है। इस सीट को हॉट प्रेस में डाला जाता है। एक बार में 7-8 सीट हॉट प्रेस में डाली जाती हैं। हॉट प्रेस में उच्च तापमान पर उसकी प्रक्रिया की जाती है। इसके बाद हॉट प्रेस से कोल्ड प्रेस में रखा जाता है। जिसके बाद तय की गई माप के अनुसार कटिंग होती है। जिसके बाद बेंच और स्कूल डेस्क जैसे फर्नीचर बनाए जाते हैं।

-आशिष शाह, संचालक, डिलक्स रिसायकलिंग



टेट्रा पैक से बनी फर्नीचर की विशेषताएं

  • इस बेंच या स्कूल डेस्क की देखभाल में कोई खर्च नहीं आता।
  • इसमें प्लास्टिक का भी उपयोग किया जाता है। जिसके चलते इसे बारिश के पानी से भी कोई नुरकसान नहीं होता।
  • इसे पॉलिश करने की आवश्यक्ता नहीं है।


टेट्रा पैक जमा करने के टिप्स


  • टेट्रा पैक को साफ करके बॉक्स में जमा करें।
  • एक बेंच के लिए 2 हजार से ढाई हजार टेट्रा पैक की जरूरत होती है।
  • एक स्कूल डेस्क के लिए 3 हजार से 3 हजार 500 टेट्रा पैक की आवश्यक्ता होती है।
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