आज शरद पूर्णिमा, चांद की रौशनी में रखें खीर !


आज शरद पूर्णिमा, चांद की रौशनी में रखें खीर !
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शरद पुर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा या फिर रस पूर्णिमा इस साल 5 अक्टुबर को मनाया जाएगा। शरद पूर्णिमा अश्विन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है, ऐसा माना जाता है की शरद पुर्णिमा की रात खीर बनाकर उसे खुले आसमान में रखने से बाधाएं दूर हो जाती है। मान्यता है कि चांद की किरणें खीर पर पड़ती हैं तो वह अमृतमयी औषधि के रूप में काम करती है।

कोजागिर पुर्णिमा के दिन लक्ष्मीनारायण की पूजा की जाती है और उन्हे खीर बनाकर प्रसाद के रुपमें दिया जाता है। कोजागिर पुर्णिमा पर गरबा भी खेला जाता है। खीर के उपर चांद की रौशनी पड़ने के बाद उसे पंडितों और कन्याओं में प्रसाद के स्वरुप में बाट दिया जाता है।

आखिर क्या है शरद पूर्णिमां का महत्तव

ऐसा माना जाता है की मां लक्ष्मी का जन्म शरद पूर्णिमा के दिन ही हुआ था। इस दिन मां लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। भगवान श्री कृष्ण और राधा की अद्भुत रासलीला का आरंभ भी शरद पूर्णिमा के दिन माना जाता है।


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