बीएमसी की उलटी गंगा, कृत्रिम तालाबों से विसर्जित मूर्तियों का विसर्जन फिर से समुद्र में


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पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए गणपति विसर्जन के लिए बीएमसी की तरफ से कई छोटे छोटे कृत्रिम तालाब बनाये गए थे। यह कृत्रिम तालाब इस उद्देश्य से बनाये गए थे कि इन तालाबों में लोग छोटी और मध्यम आकार की गणपति का विसर्जन कर सकेंगे। इससे समुद्र में गणपति मूर्ति विसर्जन की संख्या में कुछ तो कमी आएगी, लेकिन अब एक उलटी तस्वीर ही पेश हो रही है। इन कृत्रिम तालाबों में विसर्जित होने वाली मूर्तियों को निकाल कर फिर से समुद्र में विसर्जित किया जा रहा है। तो ऐसे में अब इन तालाबों की उपयोगिता पर सवाल उठने लगे हैं?

इसीलिए बनाए गए थे कृत्रिम तालाब 
गणेशोत्सव में बड़े पैमाने पर लोग समुद्र में गणपति विसर्जन करते हैं, लेकिन विसर्जन के अगले दिन ही समुद्री किनारों पर लाखो टन कचरा जमा हो जाता है और समुद्र का पानी जो प्रदूषित होता है वह अलग। इसे दखते हुए बीएमसी की तरफ से निर्णय लिया गया कि मुंबई में कुछ स्थानों पर कृत्रिम तालाब बनाए जाएंगे और उसी में छोटी और मध्यम आकार की गणपति का विसर्जन किया जाएगा। ताकि अधिक नहीं तो छोटी मात्रा में ही गणपति का विसर्जन समुद्र में होने के रोका जा सके।

तालाब से फिर समुद्र में 
इसके बाद बीएमसी की तरफ से मुंबई भर में लगभग 31 कृत्रिम तालाब बनाये गए। जहां दस दिनों में करीब 10 हजार से अधिक मूर्तियों का विसर्जन इन तालबों ने होने लगा। लेकिन बीएमसी फिर से इन मूर्तियों के अवशेषों को निकाल कर इन्हे समुद्र में विसर्जित करने लगी। बीएमसी की इस करतूत से पर्यावरण प्रेमी काफी नाराज बताए जा रहे हैं।

आखिर पुराने फार्मूले पर काम क्यों नहीं?
सूत्रों के मुताबिक मुंबई में कृत्रिम तालाब बनाने की अवधारणा पूर्व महापौर डॉ. शुभा राउल का था। शुरू में यह तय किया गया था कि मूर्तियों के प्लास्टर ऑफ़ पेरिस को सूखा कर उनसे ईंट बनायीं जाएंगी। लेकिन प्रत्यक्ष रूप से ऐसा हो नहीं सका, फिर जब तालाब मूर्तियों से भर गए तो कुछ चारा नहीं देखते हुए इन्हे फिर से समुद्र में विसर्जित करने का निर्णय लिया गया।

अधिकारी क्या बोते हैं?
इस बार में बीएमसी के एक अधिकारी ने कहा कि यह एक धार्मिक मुद्दा है इसीलिए इस पर अधिक बोलना सही नहीं है। अधिकारी ने बस इतना ही कहा कि मूर्तियों के अवशेषों को फिर से समुद्र में विसर्जित करने का आदेश वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ से आया था।

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