24 साल की लड़की का दिल और फेफड़े का एक साथ प्रत्यारोपण

अक्षरा बचपन से ही वेंट्रिक्युलर सेप्टल डिफेक्ट्स से पीड़ित थी।

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24 साल की मुंबई की अक्षरा को मनो एक नया जन्म मिल गया हो। अक्षरा एक दुर्लभ और जटिल जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित थी। अक्षर को जन्म से ही यह बीमारी थी। अक्षरा बचपन से ही वेंट्रिक्युलर सेप्टल डिफेक्ट्स से पीड़ित थी। इतना ही नही, सही तरह से अक्षर का इलाज न हो पाने के कारण अक्षरा को इसेनमेंजर्स सिंड्रोम भी हो गया था। मुंबई के ग्लोबल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने अक्षर का हृदय और फेफड़े का सयुंक्त प्रत्यारोपण  किया जिससे अक्षरा को एक नई जिंदगी मिली।


 अक्षरा के इस आपरेशन को जिस डॉक्टरों की टीम ने अंजाम दिया उस टीम के हेड और हृदय और फेफड़ा विभाग के डायरेक्टर डॉक्टर संदीप अट्टावर ने कहा कि जिन लोगों को इसेनमेंजर्स सिंड्रोम हो जाता है उन्हें अगर बचपन मे ही सही इलाज मिल जाए तो उनकी बीमारी को कंट्रोल में रखा जा सकता है, इसके साथ ही अंगदान में भी लोगों को हिस्सा लेना चाहिए, जितने ज्यादा लोग अंगदान में हिस्सा लेंगे उतना ही किसी और को जिंदगी मिलने का मौका बाद जाएगा।


अक्षरा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि " उसे जरा भी विश्वास नही था कि उसकी ये बीमारी ठीक हो सकती है, लेकिन जब अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे बताया कि वह ठीक हो जाएगी तो उसकी खुशी का ठिकाना नही रहा, उसने अपने परिवार वालो को भी बताया कि वह ठीक हो जाएगी और फिर से अपनी नॉर्मल जिंदगी जी सकती है"। अक्षरा आने वाले दिनों में अपने आप को फार्मासिस्ट के फील्ड में देखना चाहती है।


इस मौके पर ग्लोबल हॉस्पिटल के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर डॉक्टर विवेक तलौलीकर और अक्षरा का पूरा परिवार भी मौजूद था।


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