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खुशखबरी! DRDO ने कोरोना की कारगर दवा बाजार में उतारी, पानी में घोल कर पीना पड़ेगा पाउडर

इसकी एक-एक थैली सुबह-शाम पानी में मिलाकर पीना पड़ेगा। इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं। जिन मरीजों को यह दवा दी गई है, वे तेजी से ठीक हो रहे हैं।

खुशखबरी! DRDO ने कोरोना की कारगर दवा बाजार में उतारी, पानी में घोल कर पीना पड़ेगा पाउडर
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देशवासियों के लिए खुशखबरी है। कोरोना (Covid 19) से सुरक्षा के लिए देश को एक और दवा मिल गई है। इस दवा कानिर्माण डीआरडीओ (DRDO) ने किया है, जिसका नाम 2DG है। सोमवार को DRDO अपनी दवा कोरोना 2-डीजी को आपातकालीन उपयोग के लिए जारी किया।

इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (rajnath singh) और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन मौजूद थे। यह दवा पाउडर के रूप में है। इसे सबसे पहले दिल्ली के डीआरडीओ कोविड अस्पताल (delhi covid hospital) में भर्ती मरीजों को दिया जाएगा।

इस दवा को DRDO के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड साइंसेज (INMAS) द्वारा विकसित किया गया था। इसे DRDO ने रेड्डीज लेबोरेटरीज के सहयोग से विकसित किया गया। क्लिनिकल रिसर्च के दौरान 2-डीजी दवा के 5.85 ग्राम पाउच तैयार किए गए हैं।

इसकी एक-एक थैली सुबह-शाम पानी में मिलाकर पीना पड़ेगा। इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं। जिन मरीजों को यह दवा दी गई है, वे तेजी से ठीक हो रहे हैं। इसी आधार पर ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (drug controller of india) ने दवा को मंजूरी दी है।

सूत्रों के मुताबिक इस दवा के एक पाउच की कीमत 500 से 600 रुपये हो सकती है। माना जा रहा है कि सरकार कुछ अनुदानों की भी घोषणा भी कर सकती है, जिसके बाद इसकी कीमत कम हो जाएगी।

इस दवा को लेकर DRDO ने 2 दावे किए हैं और ये दोनों ही बेहद अहम हैं। डीआरडीओ के मुताबिक, इस दवा से मरीजों की ऑक्सीजन पर निर्भरता कम होगी, साथ ही उनके ठीक होने की संभावना 2-3 दिन में ही बढ़ जाएगी, जिससे कोरोना मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने की अवधि भी कम हो जाएगी।

गौरतलब है कि, पूरे देश में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और बेड की कमी है। ऐसे में यह दवा को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं वो अगर सही साबित होते हैं तो यह दवा गेम चेंजर साबित हो सकती है।

परियोजना निदेशक डॉ. सुधीर चंदना के मुताबिक हल्के, मध्यम और गंभीर लक्षणों वाले मरीजों का 2-डीजी टेस्ट किया गया। सभी प्रकार के रोगी इससे लाभान्वित हुए और कोई अच्छी बात यह है कि उनमें कोई गंभीर दुष्प्रभाव भी नहीं देखा गया।

इसलिए, यह एक सुरक्षित दवा है। परीक्षण के दूसरे चरण में रोगी के ठीक होने की दर अच्छी थी, और तीसरे चरण में, रोगी की ऑक्सीजन पर निर्भरता काफी कम हो गई थी।

डीआरडीओ और डॉ. रेड्डीज लैब तेजी से इस दवा का उत्पादन कर रहे है। आज दस हजार डोज की पहली खेप बाजार में उतारी गई है। फिलहाल दिल्ली में डीआरडीओ के कोविड सेंटर में मरीजों को यह दवा दी जाएगी।

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