तीन साल बाद मरीज को दी उसकी आवाज, वोक्हार्ट हॉस्पिटल का कारनामा

एसिड पीने से मनीष के गले की आवाज वाली नली में जख्म हो गया था और वह चिपक गयी थी। इसीलिए वह बोल पा रहा था।

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सिलवासा का रहने वाला 19 वर्षीय मनीष ने साल 2015 में किसी बात पर नाराज होकर एसिड पी कर आत्महत्या करने की कोशिश की थी। तत्काल इलाज होने के कारण मनीष को तो बचा लिया गया लेकिन मनीष की आवाज हमेशा के लिए चली गयी। लेकिन अब मनीष बोलने लगा है और यह हैरत अंगेज कारनामा किया है मीरा रोड के वोक्हार्ट हॉस्पिटल ने।


क्या हुआ था मनीष के गले में?
उस हादसे को याद करते हुए मनीष की मां की आंखे भर आती है। वे कहती हैं कि एसिड पीने से मनीष के गले की आवाज वाली नली में जख्म हो गया था और वह चिपक गयी थी। इसीलिए वह बोल पा रहा था। घर वालों ने मनीष का इलाज विनोवा भावे हॉस्पिटल में कराना शुरू किया। वहां इनकी मुलाक़ात ईएनटी की डॉक्टर डॉ. नीपा वेलीमुट्टम से हुई। डॉक्टर नीपा ने मनीष के परिजनों को मीरा रोड के वोक्हार्ट में मनीष के ईलाज की सलाह दी। इसके बाद मनीष को वोक्हार्ट में लाया गया।


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ऑपरेशन से बची जान 
वोक्हार्ट में मनीष की सारी जांच फिर से की गयी और उसका ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया। इस विषय पर अधिक जानकारी देते डॉ नीपा वेलीमुट्टम ने बताया कि एसिड पीने से मनीष की श्वासनलिका में जख्म हो गया था और वह बोल नहीं सकता था। इसके बाद डॉक्टरों ने उसके श्वासनलिका में एक छेद किया जिससे मनीष सांस ले सकें। हालांकि इस ऑपरेशन में मनीष की जान बच तो गयी लेकिन उसकी आवाज चली गयी। वह बोल नहीं सकता था। 


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डोक्टरों ने ऑपरेशन का लिया निर्णय 
डॉ नीपा वेलीमुट्टम बताया कि वोक्हार्ट हॉस्पिटल में कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. कृतार्थ ठाकर और एनस्थेसिया की डॉ. विनीता संगई ने अन्य डॉक्टरों से सलाह मशविरा करके मनीष के श्वासनलिका का ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। निर्णय लिया गया कि श्वासनलिका के खराब भाग को  दिया जायेगा और फिर से श्वासनलिका को जोड़ दिया जाएगा। जिससे ऑक्सीजन आसानी से पास हो सकेगी।


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मनीष के जीवन में लौटी खुशियां 
आपको बता दें कि इस तरह के ऑपरेशन को मेडिकल के इतिहास में काफी संवेदनशील माना जाता है लेकिन वोक्हार्ट के डॉक्टरों ने इसे सफलतापूर्वक कर दिखाया। जिससे मनीषा की आवाज फिर से आ गयी। मनीष के पिता देवभाई ने बताया कि मनीष की आवाज दो साल पहले आ चुकी होती लेकिन सिलवासा में आधुनिक मशीनों से लैस कोई बड़ा हॉस्पिटल नहीं था इसीलिए उपचार में विलम्ब हुआ। अब हमें ख़ुशी है ख़ुशी है कि मनीष अब बोलने लगा है।

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