रक्तदान कर बचाएं थेलेसीमिया पीड़ित की जान

 Mumbai
रक्तदान कर बचाएं थेलेसीमिया पीड़ित की जान
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मुंबई - थेलेसीमिया से पीड़ित लोगों को इन दिनों रक्त की समस्या से जूझना पड़ रहा है। मार्च से जुलाई के बीच कम रक्तदान होने के चलते थेलेसीमिया से पीड़ितों के सामने जिंदगी और मौत का सवाल खड़ा हो जाता है। 

थेलेसीमिया बच्चों को माता-पिता से अनुवांशिक तौर पर मिलने वाला रक्त-रोग है। इस रोग के होने पर शरीर की हीमोग्लोबिन निर्माण प्रक्रिया में गड़बड़ी हो जाती है जिसके कारण रक्तक्षीणता के लक्षण प्रकट होते हैं। इसकी पहचान तीन माह की आयु के बाद ही होती है। इसमें रोगी बच्चे के शरीर में रक्त की भारी कमी होने लगती है जिसके कारण उसे बार-बार बाहरी खून चढ़ाने की आवश्यकता होती है। 

थेलेसीमिया पी‍डि़त के इलाज में काफी बाहरी रक्त चढ़ाने और दवाइयों की आवश्यकता होती है। इस कारण सभी इसका इलाज नहीं करवा पाते। जिससे 12 से 15 वर्ष की आयु में बच्चों की मृत्य हो जाती है। भारत की कुल जनसंख्या का 3.4 प्रतिशत भाग थैलेसीमिया ग्रस्त है। इस रोग का फिलहाल कोई ईलाज नहीं है। रक्त की भारी कमी होने के कारण रोगी के शरीर में बार-बार रक्त चढ़ाना पड़ता है। रक्त की कमी से हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता है। थेलेसीमिया को लेकर हो रही रक्त की कमी पर बड़े डॉक्टर्स भी चिंता जता रहे हैं।

रक्तदान कितना जरूरी-

रक्तदान का अर्थ सिर्फ खुद के दान से नही होता बल्कि रक्तदान से अभिप्राय किसी जरूरतमंद को जीवन के दान से है, साथ ही आप जरूरतमंद व्यक्ति और उसके परिवार वालों को खुशियां भी दान में देते हो। इससे आपको ऐसी ख़ुशी मिलती है जिसे बयां नही किया जा सकता। 

बहुत से ऐसे लोग होते है जो सोचते है कि रक्तदान करने से उनके शरीर को खतरा हो जाता है या फिर उनमे कमजोरी आ जाती है। कुछ तो ये सोचते है कि रक्तदान के बाद उनके खुद के खून को बनने में कई साल लग जाते है किन्तु ऐसा कुछ नही होता क्योकि रक्तदान एक सुरक्षित और स्वस्थ परंपरा और जहां तक खून के दुबारा बनने की बात है तो उसे शरीर मात्रा 21 दिनों के अंदर दोबारा बना लेता है। साथ ही खून के वॉल्यूम को शरीर सिर्फ 24 से 72 घंटो में ही पूरा कर लेता है। तो रक्तदान से पहले अपने मन से हर तरह की शंका को जरुर दूर कर लें। हमारे शरीर के कुल वजन का 7 % हिस्सा खून होता है। इसलिए अगर हर व्यक्ति साल में इसका मात्र 3 % भी दान कर दें तो खून की कमी से किसी भी व्यक्ति की जान नही जायेगी।

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