OMG: मुंबईकर जो पानी पी रहे हैं उसमें है वायरस, जांच में सामने आई बात

यह रिसर्च किया है IIT-BOMBAY जैव प्रौद्योगिकी विभाग और विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग के किरण कोंडाबगिल की टीम ने।

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मुंबईकर जो पानी पी रहे हैं क्या उसमें वायरस है? एक रिसर्च के तहत यह बात सामने आई है कि मुंबईकर जो पानी पी रहे हैं उसमें वायरस है। यह रिसर्च किया है IIT-BOMBAY जैव प्रौद्योगिकी विभाग और विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग के किरण कोंडाबगिल की टीम ने। यह रिसर्च तब सामने आया है जब अभी कुछ दिन पहले बीएमसी ने यह दावा किया था कि, नलों में आने वाले पानी को अब मुंबईकर बिना छाने और गरम करके भी पी सकते हैं।  

20 नए वायरसों का पता चला
यह रिसर्च हाल ही में साइंटिफिक रिपोर्ट्स नामकी एक साइंस की मैगजीन में छपी है। रिसर्च में शहर के सीवेज, डेयरी यूनिट के लिए काम में लाए जाने वलए जल संयंत्र, घरेलू कमा के उपयोग में लाए जाने वाले पानी के नमूनों की जांच की। इस जांच में 20 नए वायरसों का पता चला।

अजीब नामकरण  
किरण पिछले पांच सालों से यह रिसर्च कर रहे हैं। किरण कोंडाबगिल ने इन वायरसों को 'बांद्रा  वायरस', 'कुर्ला वायरस', 'पवई लेक वायरस', 'मिमी वायरस', 'बॉम्बे'  जैसे अजीब तरह से 'नाम भी दिया है। रिसर्च के अनुसार ये वायरस एक शरीर से दूसरे शरीर में जाते हैं। इन शोधकर्ताओं का दावा है कि वे शरीर से डीएनए की नकल करते हैं और उस डीएनए को दूसरे के शरीर में भेज देते हैं।

इंसानों के लिए खतरनाक नहीं
इस टीम ने यह भी बताया कि अन्य वायरसों के मुकाबले अधिक तीव्र गति से विकसित होता है। लेकिन टीम का यह भी कहना है कि लोगों को चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है क्योंकि यह वायरस इंसानों के लिए खतरनाक नहीं है।

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