मुंबई में 75 फिसदी कुष्ठ रोगी!

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मुंबई में 75 फिसदी कुष्ठ रोगी!

राज्य में वार्षिक आधार पर 450 कुष्ठ रोगी का रजिस्ट्रेशन किया गया , लेकिन ये ताज्जुब की बात है की इन 450 कुष्ठ रोगियों में से 75 फिसदी कुष्ठ रोगी मुंबई से होते है। राज्य के आरोग्य सेवा विभाग के संचालक (कुष्ठरोग) डॉ. राजू जोतकर का कहना है की इन सभी मरिजो में से सिर्फ 25 फिसदी मरीज ही शहर के बाहर से अपना इलाज कराने आते है। शहर में सबसे ज्यादा कुष्ठ रोगियों की संख्या एम पूर्व और एल विभाग में पाई गई है।

पुराने दिनों में कुष्ठ रोगियों को कई लोग अपने पास नहीं आने देते थे, जो अभी भी कई स्थानों पर देखा गया है। ऐसे रोगियों का पता लगाने के लिए राज्य सरकार ने कार्यक्रम शुरू किया जहां कुष्ठ रोगियों का पता चला और उन्हें इलाज दिया।

कुष्ठ रोग क्या है?
कुष्ठ रोग एक संक्रामक रोग है
यह बैक्टीरिया मायकोबैक्टीरियम लेप्रे या माइकोबैक्टीरियम लेप्रोमैटिस के कारण दीर्घकालिक संक्रमण होता है।
यह जीवाणु लंबे समय तक शरीर में रहता है लेकिन 9 से 10 वर्षों तक लक्षण दिखाई नहीं देते हैं।
कुष्ठ रोग का बैक्टीरिया त्वचा में प्रवेश करता है और धीरे धीरे बढ़ता है।
जिसके बाद व्यक्ति कमजोर महसूस करता हैय़
जो लोग उपचार नहीं करते हैं वे अपनी उंगलियां खो देते हैं।

एकवर्थ अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ अमिता पेडनेकर का कहना है की "हमारे पास कुष्ठ रोगी मरीज 40 से 50 साल से रहते हैं। उनके परिवार के सदस्यों ने उन्हें यहां छोड़ दिया और हमने उनकी देखभाल की। अब वे एक सामान्य जीवन जी रहे हैं। इस बीमारी के बारे में गलत धारणाएं हैं , और इसलिए समाज उन्हें स्वीकार नहीं करता है।"


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