सरकारी अस्पतालों में दवाओं की हेराफेरी रोकने के लिए पैकेट पर हो बारकोड, बीएमसी ने दिया सुझाव


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बीएमसी के अस्पतालों में दवाओं की कमी को दूर करने के लिए बीएमसी की तरफ से सुझाव दिया गया है कि अस्पतालों में आपूर्ति की जाने वाली दवाओं के पैकेट पर बारकोड अंकित किया जाए। ऐसा इसीलिए ताकि दवाओं की हेराफेरी को रोका जा सके।

दरअसल सरकारी अस्पताल में दवाओं की कमी का होना यह कोई नयी बात नहीं है। अस्पताल में आपूर्ति की जाने वाली दवाओं को बेच दिया जाता है और फिर मरीजों को बाहर से दवा लाने के लिए कहा जाता है। ऑनलाइन एनबीटी ने यह रिपोर्ट प्रमुखता से छापी थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने पर न केवल आर्थिक भार बढ़ता है, बल्कि वे परेशान भी होते हैं। मरीजों की परेशानियों को देखते हुए बीएमसी अधिकारियों द्वारा ही सुझाव दिया गया है। साथ ही इस संदर्भ में जांच कमिटी की तरफ से भी कई सुझाव दिए गये हैं।

रिपोर्ट बताती है कि बीएमसी के अस्पतालों में हर साल लगभग 200 करोड़ रुपए दवाओं पर खर्च किये जाते हैं, इसके बाद भी मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। यही नहीं अस्पताल में जो दवाएं आपूर्ति की जाती है उनका कोई  रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता है। इसीलिए दवाओं के स्टॉक पर नजर रखने के लिए और गड़बड़ी से रोकने के लिए बीएमसी अस्पतालों में दी जाने वाली सभी दवाओं पर बारकोड लगाने का फैसला लिया है। 

इस बारे में बीएमसी स्वास्थ्य विभाग की अडिशनल कमिश्नर डॉ. अश्विनी जोशी का कहना है कि इस पर हम विचार कर रहे हैं। और संबंधित लोगों से राय भी ली जा रही है। सब कुछ सही रहा तो दवाओं पर बारकोड दिया जा सकता है।

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