राजनीति का शिकार हुई वन रूपी क्लिनिक, इन दो स्टेशनों के क्लिनिक हुए बंद


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आखिरकार जिसका डर था वही हुआ, राजनीति का शिकार हो ही गई वन रूपी क्लिनिक। घाटकोपर और कुर्ला रेलवे स्टेशनों पर स्थित वन रूपी क्लिनिक को बंद करने का आदेश रेलवे ने दे दिया है। रेलवे ने आरोप लगाया है कि वन रूपी क्लिनिक में 24 घंटे MMBS डॉक्टरों की ड्यूटी लगाने की शर्त थी लेकिन वहां BAMS डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जा रही है। यही नहीं शर्त को तोड़ने के आरोप में वन रूपी क्लिनिक पर 1 लाख रूपये का जुर्माना भी रेलवे ने लगाया है। शुक्रवार आधी रात से इन दोनों क्लिनिक के शटर डाउन हो जाएंगे। अब 15 जून को रेलवे के इस आदेश के खिलाफ वन रूपी क्लिनिक के डॉक्टर भूख हड़ताल पर बैठेंगे।


बंद करने के लिए था राजनीतिक दबाव 
रेलवे ने वन रूपी क्लिनिक को एक नोटिस भेजा है जिसमें 24 घंटे MBBS डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने की बात कहते हुए 1 लाख रूपये जुर्माना भरने की बात कही गयी है। इस बारे में वन रूपी क्लिनिक के प्रमुख डॉ. राहुल घुले का कहना है कि एक साल पहले भी रेलवे ने इसी तरह की एक नोटिस भेजी थी। उन्होने कहा 24 घंटे MBBS डॉक्टर उपलब्ध होना संभव नहीं है क्योंकि यह एक चैरिटेबल क्लिनिक है। उन्होंने आगे कहा कि डॉक्टर जहां नौकरी करते हैं या फिर जहां वे अपनी क्लिनिक पहले से ही चला रहे हैं वहां उनका रहना अनिवार्य होता है तो ऐसे में रात में डॉक्टर कैसे उपलब्ध होंगे? राहुल घुले ने आगे कहा कि 2 वन रूपी क्लिनिक को बंद करने के लिए उन पर 2 महीना पहले से ही राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा था। इस बारे में घुले ने रेलवे को पत्र लिख कर चेताया भी था लेकिन रेलवे ने कोई भी ध्यान नहीं दिया।


 बैठेंगे भूख हड़ताल पर 
मुंबई लाइव से बात करते हुए राहुल घुले ने कहा कि रेलवे के इस निर्णय के खिलाफ शनिवार 15 जून को सभी क्लिनिक के डॉक्टर और कर्मचारी ठाणे रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर अंशकालिक भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

 
इसीलिए खोला गया था वन रूपी क्लिनिक 
आपको बता दें कि मध्य रेलवे के कई स्टेशनों पर वन रूपी क्लिनिक खुला है। इस क्लिनिक में मात्र 1 रूपये में ही लोगों की जाँच पड़ताल की जाती है। ऐसा इसीलिए क्योंकि रेलवे में यात्रा करते समय अनेक यात्री दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं, समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण यात्रियों की मौत हो जाती है। इसीलिए समय पर उपचार उपलब्ध हो सके इसी उद्देश्य से वन रूपी क्लिनिक खोला गया था। लेकिन सवाल उठ रहा है कि आखिर इस भले काम के लिए किस राजनीतिक पार्टी को नुकसान हो रहा था।

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