Advertisement

कोविड के बाद महाराष्ट्र में बढ़ रहे है TB के मामले

टीबी दुनिया के सबसे घातक बीमारियो में से एक है, हर दिन, लगभग 4000 लोग टीबी से अपनी जान गंवाते हैं।

कोविड के बाद महाराष्ट्र में बढ़ रहे है TB के मामले
SHARES

हर साल हम टीबी के होनेवाले  स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक परिणामों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने और वैश्विक टीबी महामारी को समाप्त करने के प्रयासों को तेज करने के लिए 24 मार्च को विश्व क्षय रोग (TB) दिवस मनाते हैं। टीबी दुनिया के सबसे घातक बीमारियो में से एक है, हर दिन, लगभग 4000 लोग टीबी से अपनी जान गंवाते हैं।

टीबी से निपटने के वैश्विक प्रयासों ने वर्ष 2000 से अनुमानित 63 मिलियन लोगों की जान बचाई है। टीबी बीमारी कोविड के बाद दूसरी सबसे खतरनाक बीमारी है, जो बैक्टीरिया ((Mycobacterium tuberculosis)) के कारण होता है। जिसका असर फेफड़ो पर पड़ता है।  यह तब फैल सकता है जब टीबी से बीमार मरीज बैक्टीरिया को हवा में बाहर निकाल देते हैं जैसे खांसने से।

विश्व क्षय रोग (टीबी) दिवस के अवसर पर जाइनोवा शेल्बी अस्पताल घाटकोपर ने एक वार्ता  का आयोजन किया गया।  इस वार्ता में टीबी और छाती रोग विशेषज्ञ और पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ तन्वी भट्ट ने प्रतिरक्षा प्रणाली और टीबी से बचाव पर व्याख्यान दिया। जायनोवा शाल्बी अस्पताल की पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. तन्वी भट्ट ने कहा "दो सप्ताह से अधिक समय तक चलने वाले किसी भी बुखार, वजन घटना ,भूख ना लगना या लंबे समय तक खांसी या दस्त के लिए एक व्यापक मूल्यांकन की आवश्यकता होती है।"

उन्होने कहा की "दुनिया के 27% टीबी के मामले भारत में पाए गए हैं, एक व्यक्ति जितना अधिक समय तक इलाज नहीं करता है या देरी से  उपचार शुरू करता है , उतनी ही अधिक संभावना है कि यह बीमारी फैलती है, लोग बीमार होते है और स्थिती घातक होती जाती है, टीबी के कई नए मामले पांच जोखिम कारकों के कारण होते हैं जिनसे अल्पपोषण, एचआईवी संक्रमण, शराब का सेवन , धूम्रपान और मधुमेह शामिल है। टीबी रोकथाम योग्य और इलाज योग्य है, टीबी रोग से पीड़ित लगभग 85% लोगों का 6 महीने की दवा के साथ सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है"

कोविड-19 और टीबी सह संबंध के बारे में बताते हुए एपेक्स अस्पताल मुलुंड के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ प्रसाद पड़वाल ने कहा "कई मामलों में लोगों ने टीबी के लक्षणों को कोरोनावायरस के साथ मिला दिया था, लॉकडाउन के दौरान लोग अस्पतालों तक नहीं पहुंच सके, क्योंकि अधिकांश अस्पताल COVID अस्पतालों में बदल दिए गए थे,इसलिए अन्य बीमारियों वाले अधिकांश रोगियों को न तो स्वीकार किया गया और न ही उनका इलाज किया गया, COVID के बाद के रोगियों में टीबी की संभावना बढ़ने का कारण प्रतिरक्षा, फेफड़ों की सूजन और कोरोनावायरस के कारण तनाव , इलाज के लिए स्टेरॉयड का उपयोग,  गरीबी और वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण कुपोषण, खराब आवास की स्थिति, मादक द्रव्यों के सेवन और एचआईवी/एड्स है"

यह भी पढ़े31 मार्च से देश में कोरोना पाबंदियों से राहत!

Read this story in English
संबंधित विषय
मुंबई लाइव की लेटेस्ट न्यूज़ को जानने के लिए अभी सब्सक्राइब करें