कोस्टल रोड परियोजना नहीं रुकेगी- हाई कोर्ट

बीएमसी के वकील अनिल साखरे ने कोर्ट को बताया कि शुरू हुए काम को रोकने पर हर दिन 11 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। राज्य सरकार के वकील मिलिंद साठे ने कहा कि सीआरजेड-एक के तहत आने वाले कोस्टल रोड के अतिसंवेदनशील भाग को सभी आवश्यक विभागों से अनुमतियां मिल गयी हैं।

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने कोस्टल रोड के कार्य को रोकने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने यह फैसला याचिकाकर्ता, बीएमसी और राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद दिया। कोर्ट में याचिका दाखिल कर इस कार्य का काम रोकने की अपील की गयी थी जिसे कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इनकार कर दिया। 

29 किमी लंबे इस कोस्टल रोड को बीएमसी का बहुप्रतीक्षित योजना माना जाता है। इसके बन जाने के बाद मुंबईकरों को ट्रैफिक समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकेगी। लेकिन आरोप लगाए जा रहे थे कि कोस्टल रोड के निर्माण में कई प्राकृतिक संसाधनों का नुकसान किया जा रहा है जिसके बाद वर्ली-कोलीवाड़ा नाखवा और वर्ली मच्छीमार सर्वोदय सहकारी सोसायटी की तरफ से इस योजना को रोकने के लिए याचिका दाखिल की गयी थी। याचिका में प्रियदर्शिनी पार्क से वरली कोलीवाड़ा के दरम्यान 9 किलोमीटर तक कोस्टल रोड परियोजना के कार्य को स्थगित करने की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ताओं की याचिका का जवाब देते हुए प्रशासन ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि इस परियोजना से समुद्री जीवों और प्राकृतिक संसाधनों का कम से कम नुकसान हो इस बात का ध्यान रखा जाएगा। यही नहीं प्रशासन की तरफ से इस बात का भी आश्वासन दिया गया कि काम शुरू होने पर स्थानीय मच्छीमारों के हितो को ध्यान में रखा जाएगा। इसके लिए एक समिति गठित की गई है, यह समिति जल्द ही काम शुरू करेगी।

बीएमसी के वकील अनिल साखरे ने कोर्ट को बताया कि  शुरू हुए काम को रोकने पर हर दिन 11 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। राज्य सरकार के वकील मिलिंद साठे ने कहा कि सीआरजेड-एक के तहत आने वाले कोस्टल रोड के अतिसंवेदनशील भाग को सभी आवश्यक विभागों से अनुमतियां मिल गयी हैं। अब इस मामले में अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी। 

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