बुलेट ट्रेन परियोजना- 19 हेक्टेयर में फैले मेंग्रोव को काटेगी सरकार

महाराष्ट्र सरकार ने पहले अदालत को सूचित किया था कि ठाणे क्रीक से गुजरने वाली प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए मैंग्रोव को हटाने की आवश्यकता होगी

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पर्यावरण और वन मंत्रालय (MoEF) ने सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि वह नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के उस प्रस्ताव पर सहमत हो गया है, जिसमें जिलों सहित प्रस्तावित मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए मैंग्रोव्स को काटने की जरुरत है।  महाराष्ट्र सरकार ने पहले अदालत को सूचित किया था कि ठाणे क्रीक से गुजरने वाली प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए मैंग्रोव  को हटाने की आवश्यकता होगी।

 ये मैनग्रोज ठाणे, नवी मुंबई, और पालघर में फैले हुए है।   इससे पहले, 18 मार्च को, महाराष्ट्र कोस्टल ज़ोन मैनेजमेंट अथॉरिटी (MCZMA) ने हाईकोर्ट को NHSRCL के प्रस्ताव के समझौते के बारे में सूचित किया था और MoEF को अंतिम अनुमोदन के लिए अनुरोध भेजा  था।19-हेक्टेयर मैंग्रोज को हटाने के लिए MCZMA द्वारा प्रस्ताव को पहले खारिज कर दिए जाने के बाद, हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन ने 22 दिसंबर, 2018 को इस मुद्दे को हल करने के लिए बॉम्बे HC का दरवाजा खटखटाया था।  हालांकि, HC ने खुद ये  अनुमति नहीं दी थी।

अपनी याचिका में, एनएचएसआरसीएल ने उल्लेख किया था कि 508 किलोमीटर लंबे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर, 155.64 किमी महाराष्ट्र में गुजरता है। ज्य में 131.3 हेक्टेयर वन क्षेत्र के साथ 18.9 हेक्टेयर क्षेत्र में जिसमें 1.5 लाख मैंग्रोव है। प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर संरक्षित क्षेत्र और पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) में आता है, जो संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान और ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य से होकर जाता है।

इससे पहले, पिछली सुनवाई के दौरान, महाराष्ट्र सरकार ने एक हलफनामा दायर किया था जिसमें बताया गया था कि  परियोजना के हिस्से के लिए मैंग्रोव को हटाने की आवश्यकता है क्योंकि भूमिगत सुरंग का निर्माण किया जाना है। 

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