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राज्य सरकार का बॉम्बे हाईकोर्ट में जवाब , माहुल में रहने की स्थिती का कर रहै है सुधार!

इसके साथ ही भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के निदेशकों को भी अपने संयंत्रों में एडवांस तकनीक का उपयोग करने के लिए कहा गया है जिससे टॉक्सिस की मात्रा कम पैदा हो सके।

राज्य सरकार का बॉम्बे हाईकोर्ट में जवाब , माहुल में रहने की स्थिती का कर रहै है सुधार!
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राज्य सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को सूचित किया है कि आईआईटी बॉम्बे द्वारा जारी रिपोर्ट के माध्यम के बाद, सरकार ने चेंबूर के पास माहुल में बुनियादी ढांचे और रहने की स्थिति में सुधार के लिए कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने यह भी कहा कि सीवेज पाइपलाइन के निर्माण, अस्पतालों के निर्माण जैसी बुनियादी सुविधाओं के काम पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के निदेशकों को भी अपने संयंत्रों में एडवांस तकनीक का उपयोग करने के लिए कहा गया है जिससे टॉक्सिस की मात्रा कम पैदा हो सके।

न्यायमूर्ति अभय ओका और न्यायमूर्ति अजय गडकरी की खंडपीठ मुंबई के नौ वार्डों से स्थानांतरित किए गए माहुल निवासियों द्वारा दायर याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी। एक अन्य याचिका में बॉम्बे हाई न्यायालय ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और राज्य सरकार को शहर की पानी की पाइपलाइनों पर बसे झोपड़ियों को ध्वस्त करने और उन्हे नया आशियाना भी देना का आदेश दिया है।

कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने माहुल में लोगों को रहने के लिए घर तो दिये लेकिन लोगों ने इन घरों में यह कहकर रहने से मना कर दिया की माहुल में प्रदूषण काफी खराब है। कई निवासियों ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है और ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश का हवाला दिया है जिसमें कहा गया है कि माहुल प्रदूषित है और आवास के लिए सुरक्षित जगह नहीं है। राज्य सरकार को अदालत ने तब निवासियों को किसी और क्षेत्र में भेजने का या उन्हे पैसे देने का निर्देश दिया था ताकी वह कही और घर देख सके।

विशेष वकील गिरीश गोडबोले ने अदालत को बताया कि आईआईटी-बॉम्बे की रिपोर्ट अंतिम रिपोर्ट नहीं है और भविष्य में एक और रिपोर्ट दायर की जाएगी। उन्होंने अदालत को सूचित किया कि राज्य सरकार प्रभावित लोगों को माहिम चर्च के पास 120 वर्गफुट के मकान या प्रत्येक परिवार को 843 रुपये प्रति माह किराया देने के लिए तैयार है। हालांकी याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वे 843 रुपये का किराया स्वीकार करने के लिए तैयार है , लेकिन राज्य सरकार उन्हे एसी जगह बताए जहां 843 रुपये के किराये में घर मिलता है।

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