बिल्डरों पर म्हाडा कसेगी नकेल

म्हाडा के इस फैसले के बाद अब उन बिल्डरों पर इसकी गाज गिरेगी जिन्होने रिडेवलेपमेंट प्रोजेक्ट को हाथ में लिया लेकिन उन्हे अधूरा छोड़ दिया।

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सेस और जर्जर इमारतों का रिडेवलेपमेंट करनेवाले बिल्डरों पर म्हाडा नकेल कसने की तैयारी में है। प्रोजेक्ट को बीच में छोड़नेवाले बिल्डरों से प्रोजेक्ट छिनने का निर्णय मह्डा ने किया है। म्हाडा के इस फैसले के बाद अब उन बिल्डरों पर इसकी गाज गिरेजी जिन्होने इस रिडेवलेपमेंट प्रोजेक्ट को हाथ में लिया लेकिन उन्हे अधूरा छोड़ दिया। मुंबई में 4000 सेस इमारते है जिनमे से 800 इमारतों के रिडेवलेपमेंट के लिए म्हाडा रिपेयर बोर्ड की ओर से एनओसी जारी की गई है।  हालांकी इनमे से कई इमारते है जिनका  रिडेवलेपमेंट का काम एनओसी मिलने के बाद भी रुका हुआ है। 

म्हाडा रिपेयर और रिडेवलेपमेंट बोर्ड के सभापति विनोद घोसालकर का कहना है की " उनके पास ऐसी कई शिकयतें आई है जिसमें बिल्डरों ने  रिडेवलेपमेंट का काम रोक दिया है और किरायेदारों को किराया भी नहीं दे रहे है , जिसके कारण उन इमारतों में रहनेवालों को दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है"। विनोद घोसालकर ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा की  " म्हाड ने अब ऐसे बिल्डरों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का फैसला लिया है, जो भी बिल्डर तीन साल में इमारतों की मरम्मत का काम नहीं शुरु करेगा उनसे प्रोजेक्ट वापस लिया जाएगा और उसके बाद म्हाडा खुद इसे रिडेवलप करेगी"

किराएदारों को 405 वर्गफुट का घर 

बीएमसी और म्हाडा के रिपेयर और रिडेवलपमेट बोर्ड की संयुक्त बैठक में सभापति विनोद घोसालकर ने सैकड़ो किराएदारों की समस्या सुनी। उन्होने कहा की " सिंगल प्रोजेक्टस में काफी दिक्कतें आती है, लिहाजा 10-15 इमरातों के किराएदार और मकान मालिकों को एक साथ आकर क्लस्टर डेवलमेंट में हिस्सा लेना चाहिये, जिससे विकास का काम और भी तेजी से हो सके।  इसके साथ ही उन्होने कहा की किराएदारों को 405 वर्गफुट का घर देने का निर्णय किया गया है 

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