मेट्रो 1 के लिए नई किराया निर्धारण समिति (एफएफसी) की स्थापना

बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिसंबर 2017 में, मेट्रो एफ -1 के लिए तीन महीने के भीतर एक नया एफएफसी के गठन का निर्देश दिया था

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एक साल की देरी के बाद मेट्रो 1 (घाटकोपर-अंधेरी-वर्सोवा) के लिए किराया की देखरेख के लिए नई किराया निर्धारण समिति (एफएफसी) की स्थापना की गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिसंबर 2017 में, मेट्रो एफ -1 के लिए तीन महीने के भीतर एक नया एफएफसी के गठन का निर्देश दिया था।

फ्रि प्रेस जनरल की खबरों के अनुसार कुछ दिनों पहले, नए FFC ने MMRDA और मेट्रो 1 अधिकारियों से मुलाकात की और अपने सुझाव दिए। मेट्रो ने एक बार फिर से प्रस्तावित किया है कि मेट्रो किराए को बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति और परिवहन (BEST) बस किराए के साधारण (गैर-वातानुकूलित) से 1.5 गुना निर्धारित किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही मेट्रो का कहना है की मेट्रो के किरायों की तुलना उपनगरीय रेलवे और विशेष रूप से, प्रथम श्रेणी और वातानुकूलित ट्रेन किराए से करना बिल्कूल सहीं नहीं है। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की अगुवाई वाली एमएमओपीएल ने मेट्रो 1 के किराए में वृद्धि का प्रस्ताव किया था।हालाँकि, MMRDA के HC के पास जाने के बाद यह प्रस्तावित बढ़ोतरी रोक दी गई थी।

मुंबई मेट्रो 1 कॉरिडोर भारत में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर आधारित पहली परियोजना है। MMOPL की 69 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि MMRDA की 26 फीसदी हिस्सेदारी है जबकि फ्रांसीसी कंपनी Veolia की 5 फीसदी हिस्सेदारी है।

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