कंप्यूटर के सामने ज्यादा देर बैठकर ना करे काम , हो सकते है ये नुकसान

इन बीमारियों के कारण अपको की तरह की तकलीफों का सामना करना पड़ता है। कई बार ये बीमारियां इतनी खतरनाक होती है की इनका अगर उम्रभर शरीर पर रहता है।

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आज कल की भागदौड़ की जिंदगी में जितना महत्तवपूर्ण है अपने रोजी रोटी का बंदोबस्त करना उतना ही महत्तवपूर्ण है अपने स्वास्थ का ध्यान रखना। कंप्यूटर के इस जमाने में आजकल के ज्यादातर काम होते है , लेकिन इन्ही कंप्यूटर के कारण कई तरह की बीमारियां भी हो रही है। इन बीमारियों के कारण अपको की तरह की तकलीफों का सामना करना पड़ता है।  कई बार ये बीमारियां इतनी खतरनाक होती है की इनका अगर उम्रभर शरीर पर रहता है। 

रीढ़ की हड्डी की एक गंभीर बीमारी

रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) में स्थित इंटर वर्टिब्रल डिस्क (आईवीडी) पर ज्यादा दबाव पड़ने से कालांतर में डीजनरेटिव डिस्क डिजीज (डीडीडी) की समस्या उत्पन्न हो जाती है। ऑफिस में डेस्क वर्क या कंप्यूटर के सामने बैठकर देर तक काम करना और भारी वजन उठाना आईवीडी में आए विकारों (डिफेक्ट्स) का एक प्रमुख कारण है। इसके अलावा शारीरिक व्यायाम का अभाव और मादक पदार्थों का अधिक सेवन युवा वर्ग में भी डिस्क की समस्या बढ़ने का एक प्रमुख कारण है।

क्या है इसके लक्षण

रोग की गंभीर स्थिति में बांहों और पैरों में लकवा लग सकता है। हाथों और पैरों में सुन्नपन और भारीपन महसूस होना। इसके साथ ही जलन और फटन महसूस होना। कुछ लोगों में यह दर्द बांहों के निचले भाग से पैरों के निचले भाग तक होता है, जिसे सियाटिका के दर्द का एक प्रकार कह सकते हैं।

क्या है इलाज

डीजनरेटिव डिस्क डिजीज (डीडीडी) की समस्या से छुटकारा पाने के लिए फ्यूजन सर्जरी का सहारा लिया जाता है। इस सर्जरी से मरीज को आराम तो मिलता है, लेकिन यह इस समस्या का स्थाई और कारगर समाधान नहीं है। इसकी समस्या का आधुनिक इलाज आर्टीफिशियल डिस्क रिप्लेसमेंट या डिस्क रिप्लेसमेंट आर्थोप्लास्टी है। इस सर्जिकल प्रक्रिया के अंतर्गत क्षतिग्रस्त इंटर वर्टिब्रल डिस्क को आर्टीफिशियल डिस्क के जरिए बदल दिया जाता है।

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