सेक्स पर बोलने से कैसी शर्म ?

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सेक्स पर बोलने से कैसी शर्म ?
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सेक्स पर बोलने से कैसी शर्म ?
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मुंबई  -  

हे देवा क्या बोलूं तुझे? गुड्डू हमारे हाथ से निकल गया। कल उसके बैग से एक मैग्जीन निकली। उसके बाद गुड्डू के पापा ने उसकी जमकर पिटाई की। रोते रोते चाची ने कहा कि प्लीज तू उसे समझा।कहानी को आगे बढ़ाने से पहले आपको बता दूं कि गुड्डू छठी क्लास का लड़का है। आप समझ ही गए होंगे कि वह कच्ची उम्र का लड़का है। उसके बैग से मां को सेक्स से संबंधित मैग्जीन मिली थी।

कहानी की ओर आगे बढ़ते हैं... चाची की बात सुनकर मैं भी दंग रह गई थी कि इतनी कम उम्र का बच्चा सेक्स मैग्जीन लेकर घूम रहा है। मेरे अंदर थोड़ा गुस्सा भी था। मैं दूसरे दिन ही गुड्डू से मिली, पहले उसकी पढ़ाई से संबंधित बातें कि बाद में मैं मुद्दे पर आई। मैंने गुड्डू से पूछा...गुड्डू तुम सेक्स से संबंधित मैग्जीन क्यों पढ़ते हो? शायद गुड्डू को मुझसे ऐसे सवाल कि उम्मीद नहीं थी, वह थोड़ा हडबड़ाया। पर उसके बाद जो उसने बताया, मैं दंग रह गई। उसके जवाब से मेरा गुस्सा पल भर में ही शांत हो गया। गुड्डू ने कहा कि, मैंने मां से पूछा था कि मैं दुनियां में कैसे आया? मां मुझपर भड़क गई और बोली आज के बाद इस तरह के सवाल मत करना। मैं देखता हूं कि टीवी पर जैसे लड़का लड़की पास में आते हैं मम्मी-पापा चेनल बदल देते हैं, आखिर ऐसा क्यों? मुझे इन सबका ठीक से किसी ने भी जवाब नहीं दिया। इसलिए मैंने मैग्जीन खरीदी।

इसके बाद मैं चाची के घर गई और मैंने चाचा-चाची को समझाया। मैंने उन्हें बताया कि गलत गुड्डू नहीं, गलत आप और आपकी सोच है। आप लोगों को उससे सेक्स के बारे में बात करनी चाहिए। बच्चों को सेक्स ज्ञान देना आवाश्यक है। बढ़ती उम्र के साथ शरीर में हार्मोनल चेंजेस आते हैं। उन्हें समझना नितांत आवश्यक है।

यह कहानी अकेले गुड्डू की नहीं हैं। गुड्डू की तरह कई ऐसे लड़के हैं, जो मैं दुनियां में कैसे आया के सवाल से जूझते रहते हैं और उन्हें इसका सही जवाब नहीं मिल पाता। इसके चक्कर में वे पॉर्न वीडियो या फिर सेक्स से संबंधित मैग्जीन पढ़ते हैं। क्या आपको नहीं लगता कि सेक्स एजुकेशन आवाश्यक है। 8-11 साल की उम्र में बच्चे किशोरा अवस्था में आ जाते हैं। इस उम्र में उन्हें सेक्स ज्ञान देना आवश्यक है। कई बार इस उम्र में लड़के - लड़कियों का शारीरिक शोषण भी होता है और वे समझ भी नहीं पाते। अगर समझ भी जाते हैं तो ऐसे मुद्दे पर पैरेंट्स से बात करने से शर्माते हैं, या फिर उनके अंदर डर रहता है। अगर हम अपने बच्चों कों फ्रैंडली माहौल दें तो वे हमसे हरेक बात साझा करेंगे।

"आठ साल की उम्र से मुझे सेक्स से संबंधित बातें आकर्षित करने लगी थी। जिसके चलते मैंने पॉर्न देखी, कुछ सेक्स से संबंधित मैग्जीन पढ़ी। पर सही तरह से मुझे कुछ समझा नहीं। फिर मैंने कुछ फोटोज देखे जिससे मुझे कुछ समझ में आया।"

-विकास ( बदला हुआ नाम )


"स्कूलों में बच्चों को सेक्स एजुकेशन देना आवश्यक है। टीवी, इंटरनेट और सोशल मीडिया पर बच्चो को अधी अधूरी जानकारी मिलती है, जो ज्यादा खतरनाक है। कई बच्चों का शारीरिक शोषण किया जाता है। पर उन्हें इसका ज्ञान ही नहीं होता कि उनके साथ क्या हो रहा है। पर सेक्स एजुकेशन देने से शारीरिक शोषण पर लगाम लगाई जा सकती है।

मीना पवार, पैरेंट्स


सेक्स एज्युकेशन में सिर्फ यह नहीं सिखाया जाना चाहिए कि शारीरिक संबंध कैसे बनाए जाते हैं। योग्य आहार, शरीर की जानकारी ,उनका कार्य, पीरियड्स, गर्भधारण, डिलीवरी, एचआयवी, एड्स, गुप्तरोग के संबंध में जानकारी, अच्छा और बुरा स्पर्श कैसे समझें? इन सबकी जानकारी दी जानी चाहिए।

डॉ. शिल्पा घोबले, डॉक्टर


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