गजब: निखिल ने जापान में बाजाई सीटी, देश में मची धूम

मुंबई के निखिल राणे ने जापान में जाकर देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने 'वर्ल्ड विस्लर्स कवेन्शन 2018' में ट्रॉफी जीती है। उनकी यह दूसरी जीत है।

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अगर बीच सड़क पे कोई सीटी बजाए तो आप उसे क्या कहेंगे?  मुंह से शायद बेवड़ा ही निकले, और अगर लड़की को देखकर किसी ने सीटी बजाई तब तो मामला गाली-गलौज और मारपीट तक पहुंच जाएगा। पर अगर मैं कहूं कि सीटी बजाने की स्पर्धा भी होती है और इससे देश का नाम रोशन हुआ है, तो ऐसा सुनकर शायद आप चौंक जाएं। पर यह सच है, लेकिन यह स्पर्धा अपने देश में नहीं जापान में होती और अपने देश के नागरिक ने इस स्पर्धा में इतिहास रच दिया है।

इस सीटी प्रतियोगिता को 'वर्ल्ड विस्लर्स कवेन्शन 2018' के नाम से मनाया गया है। इस स्पर्धा में मुंबई के निखिल राणे ने भारत को दूसरी बार चॅम्पियनशिप ट्रॉफी दिलवाया है।


सायलेंट विस्लर्स

निखिल की सीटी बजाने की पद्धति मूक अर्थात 'सायलेंट विसल' की है। सामान्यतः सीटी बजाने के लिए होठों का इस्तेमाल किया जाता है। पर सायलेंट विसल से बिना होठों का इस्तेमाल किए सीटी बजाई जाती है। दुनियां में सायलेंट सीटी बजाने वाले सिर्फ दो ही लोग हैं। पहले हैं बॉस्टन के जेफरी एमॉस और दूसरे मुंबई नगरी के निखिल राणे।  

इस साल की प्रतियोगिता में निखिल को हिकीफुकी प्रकार में अवॉर्ड प्राप्त हुआ। प्रतियोगिता के दौरान निखिल ने ‘शोले’ फिल्म के गाना 'मेहबूबा मेहबूबा' में सीटी बजाई। इसके अलावा उन्होंने खंजिरी, पियानिका, दरबुका (अरेबिक वाद्य) और घुंगरु वाद्य में सीटी बजाई।

स्पर्धा में शामिल होने के लिए निखिल ने इतनी मेहनत की थी, कि 7 महीनों तक उन्होंने इसकी तैयारी के अलावा और कुछ काम नहीं किया।

 

7 साल की उम्र में की थी शुरुआत

मुंबई स्थित ताडदेव परिसर में निखिल का पालन पोषण हुआ और वे परिवार के साथ वहां बड़े हुए। मात्र 7 साल की उम्र से निखिल को सीटी बजाने का सौख दौड़ा था और वे सीटी बजाने लगे। उन्हें शास्त्रीय संगीत से भी काफी लगाव था। उन्होंने 5 सालों तक शास्त्रीय संगीत भी सीखा। निखिल जब 12वीं में थे तब उन्होंने अपने एक दोस्त के जन्मदिन में पहली बार सबके सामने सीटी से गाने की धुन पेश की थी। उस समय उनकी जमकर प्रसंशा हुई थी। उसके बाद उन्हें आगे बढ़ने में उनके दोस्तों ने भी साथ दिया। घर की परिस्थिति काफी अच्छी नहीं थी इसलिए कॉलेज के दिनों में उन्होंने बहुत से कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इन कार्यक्रमों से मिले पैसे से वे खुद का खर्चा चलाते थे। निखिल वर्तमान में आकाशवाणी में आरजे हैं।

मेरी कला को स्कूल के शिक्षकों, परिवारवालों और दोस्तों ने सराहा और मेरा साथ दिया। गले से साटी बजाना इतना आसान काम नहीं है। इसके लिए मुझे खुद पर बहुत मेहनत करनी पड़ी है। मेरे कोई गुरु नहीं हैं। मैं इसके लिए प्राणायम और जॉगिंग करता हूं दौड़ते वक्त भी मैं सीटी निकालती हूं। जिसके चलते मेरी स्वास लेने की क्षमता अधिक बढ़ी है। - निखिल राणे, सायलेंट विस्लर



सीटी इन्स्टिट्यूशन

निखिल ने दूसरी बार इस स्पर्धा में ट्रॉफी जीतकर निश्चित रूप से देश का नाम गौरान्वित किया है। निखिल अब सीटी बजाने के लिए एक इन्स्टिट्यूशन खोलने का विचार कर रहे हैं ताकि इच्छुक गोल सीटी बजाने की कला को सीख सकें। निखिल का भी मानना है कि कोई भी गले से सीटी बजा सकता है, अगर उसे सही टेक्निक पता होगी।


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