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मुंबई में कोरोना टीकाकरण बना राजनीति का अखाड़ा

मुंबई महानगरपालिका (bmc) ने मुंबई के वरिष्ठ नागरिकों के लिए ड्राइव इन टीकाकरण केंद्र शुरु किया है लेकिन ये टीकाकरण केंद्र वर्तमान में राजकीय आखाड़े बनकर सामने आने लगे हैं।

मुंबई में कोरोना टीकाकरण बना राजनीति का अखाड़ा
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आज के दौर में कहां राजनीति हो जाए, कौन किस मुद्दे को राजनीति करके अपना स्वार्थ सिद्ध कर ले, कुछ कहा नहीं जा सकता। राजनीति के अनेक रंग हर दिन देखने को मिलते हैं, कभी ये रंग बहुत गहरे होते हैं तो कभी इसके रंग का पता ही नहीं चलता। मुंबई महानगरपालिका (bmc) ने मुंबई के वरिष्ठ नागरिकों के लिए ड्राइव इन टीकाकरण केंद्र शुरु किया है लेकिन ये टीकाकरण केंद्र वर्तमान में राजकीय आखाड़े बनकर सामने आने लगे हैं। कुछ दिनों पहले भांडुप के एक टीकाकरण केंद्र को लेकर शिवसेना (shiv sena)  और भाजपा (bjp) के बीच जो विवाद हुआ, उससे पूर मुंबई (Mumbai) के सम्मान पर धक्का लगा है। इन विवाद के बाद अंधेरी स्पोर्टस् कॉम्प्लेक्स में भाजपा-शिवसेना के नेताओं- कार्यकर्ता के बीच जोरदार टकराव हुआ। दोनों दलों के लोगों के बीच धक्काबुक्की, गाली-गलौच करके अपने- अपने राजनीतिक एजेंडे को अमल में लाया। इसके बाद दोनों राजनीतिक दलों ने एक दूसरे के विरोध में पुलिस थाने में  रिपोर्ट दर्ज करायी। इसके बाद लगभग एक घंटे बाद टीकाकरण का काम शुरु हुआ।

मुंबई माहनगरपालिका प्रशासन ने (bmc) मुंबई में  सात स्थानों पर 'ड्राइव इन' टीकाकरण केंद्र शुरु करने का निर्णय लिया, इनमें अंधेरी स्पोर्टस कॉम्प्लेक्स नामक केंद्र का 8 मई को सुबह 11 बजे शुभारंभ होने वाला था। उद्घाटन कार्यक्रम से पहले वहां भाजपा की विधायक भारती लवेकर (bharati lavekar) अपने कार्यकर्ताओं के साथ उपस्थित थीं। कुछ देर बाद वहां पर मुंबई महानगरपालिका के स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष राजुल पटेल (rajul Patel) शिवसेना कार्यकर्ताओं के साथ वहां उपस्थित हुए, इसके बाद धीरे-धीरे वहां दोनों दलों के कार्यकर्ताओं का जमावाडा बढ़ने लगा। निर्धारित समय के बाद भी जब टीकाकरण (vaccination) शुरु नहीं हुआ तो वहां पहुंचे नागरिकों तथा उनके रिश्तेदारों ने नाराजी व्यक्त करने की शुरुआत की, इसके बाद पटेल ने कहा कि पहले टीकाकरण किया। टीका लगाने के कार्य में बहुत विलंब होने से शिवसेना के नेता तथा कार्यकर्ता देर होने के कारण काफी नाराज हुए। मुंबई महानगरपालिका के अधिकारियों ने जब यह बताया कि टीकाकरण कार्य शुरु होने में अभी विलंब है, तो भाजपा के कार्यकर्ता भी इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हो गए। किसके कहने पर टीकाकरण किया जा रहा था, ऐसा सवाल उठाते हए दोनों पक्षों के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के बीच विवाद शुरु हो गया। राजुल पटेल तथा भारती लवेकर के बीच शाब्दिक नोंकझोक के बाद वाद-विवाद भी हुआ। उसके बाद भाजपा और शिवेसना दोनों की ओर कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-बुक्की हो गई। राजुल पटेल तथा शिवसैनिक हारुन खान ने bjp पर अपने कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-बुक्की की, ऐसा आरोप लगाया साथ ही भारती लवेकर ने भी भाजपा कार्यकर्ता के साथ मारपीट का आरोप लगाया। योगीराज दाभोडकर समेत भाजपा कार्यकर्ता शिवसेना के कार्यकर्ता धक्का बुक्की किए जाने के बारे में पटेल ने जानकारी दी।

पिछले कई वर्षों से आयोग ने अपनी पुरानी प्राथमिक जिम्मेदारी भूलकर केंद्र की सत्ताधारियों के हाथ का खिलौना बन कर रह गया है। इस संस्था की नैतिक पतन की यह प्रक्रिया रुकनी चाहिए, ऐसा आयोग को लगता नहीं है। ऑक्सिजन की आपूर्ति से इंजेक्शन की कमी होने की जानकारी देते समय प्रत्यक्ष अस्पताल में जाकर परिस्थिति की कल्पना प्रशासन तथा सरकारी तंत्र को दे रहे हैं, उनकी सराहना करने की जगह आयोग ने मीडिया की स्वतंत्रता पर नियंत्रण करने की बात करें, यह संस्था अपनी यात्रा किसी दिशा में है, यह स्पष्ट किया है। पश्चिम बंगाल के चुनाव के आठ चरण में लेकर आयोग ने सत्ताधारियों को मदद की। चुनाव प्रचार में सभी को स्वंत्रता दी। कोरोना महामारी को समाप्त करने के लिए की गई तालाबंदी (lock down) के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

विगत एक मई को 'महाराष्ट्र दिवस' के मौके पर महाराष्ट्र में कोरोना के खिलाफ निर्णायक जंग शुरु की गई। इसके तहत 18 वर्ष से अधिक  आयु के सभी लोगों को राज्य सरकार की ओर से निशुल्क  टीका लगाने का निर्णय लिया गया। हालांकि 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी लोगों को टीका लगाने का निर्णय अच्छा भले ही हो, तो भी इस पर अमल करना उतना आसान नहीं, जितना समझा जा रहा है। वर्तमान में तो स्थिति ऐसी है कि सभी वरिष्ठ नागरिकों को लगे, उतने भी टीके शेष नहीं बचे हैं, ऐसा होने पर भी 18 वर्ष तथा उससे अधिक आयु के सभी लोगों को टीका कैसे दिया जाएगा, यही सबसे बड़ा सवाल है।कोरोना के खिलाफ जारी जंग जीतने के लिए राज्य सरकार को केंद्र सरकार की ओर से मदद की दरकार है. केंद्र सरकार की पहली नज़र महाराष्ट्र की ओर होनी चाहिए। राज्य सरकार कहीं से भी टीका खरीदे तथा उसे नागरिकों को लगवाये।

महाराष्ट्र में 18 से 44 वर्ष की आयुसीमा वाले लोगों की संख्या 5.71 करोड़ नागरिक हैं। वर्तमान में जारी टीकाकरण की गति देखकर इस प्रक्रिया को पूरा होने में कई माह लग सकते हैं। इसका सीधा अर्थ यह तरफ टीकाकरण की गति बढ़ाना तथा दूसरी तरफ कोरोना ग्रस्त मरीजों की की बढ़ती संख्या वास्तव में एक सही प्लानिंग से काम करने की जरूरत की ओर से इशारा कर रही है।निरंतर बिगड़ते हालातों को ध्यान में रखते हुए अगर शिवसेना-भाजपा के नेताओं-कार्यकर्ताओं के बीच हुई नूराकुश्ती से इस बात की पुष्टि होती है कि उक्त दोनों को कोरोना की भयावहता से सरोकार नहीं है। जिन लोगो को जनता की मदद के लिए आगे आना चाहिए वही अगर भिड़ पड़े तो यह समझने में देर नहीं लगेगी कि मुंबई में कोरोना का कहर क्यों बढ़ रहा है।

Note: लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, ये लेखक के विचार हैं।

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