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यह प्राकृतिक आपदा है, हर मुंबईकर को दिए जाएं 10 हजार रुपये, BJP नेता की मांग

भातखलकर ने मांग की है कि, इन दो दिनों में आने वाली बाढ़ को प्राकृतिक आपदा घोषित किया जाना चाहिए और लोगों की 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद करनी चाहिए।

यह प्राकृतिक आपदा है, हर मुंबईकर को दिए जाएं 10 हजार रुपये, BJP नेता की मांग
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मुंबई में पिछले 3 दिनों से भारी बारिश (heavy rain in mumbai) हो रही है। इस बारिश के कारण लोगों का आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। स्लम इलाकों से लेकर कई सोसायटियों में पानी के घुसने की खबर है।

रिपोर्ट के अनुसार केवल 12 घंटों में 294 मिमी बारिश हुई, जिसका मतलब है कि यह एक प्राकृतिक आपदा है। इसे देखते हुए बीजेपी विधायक अतुल भातखलकर (atul bhatkhalkar) ने मांग की है कि मुख्यमंत्री को तुरंत प्रत्येक प्रभावित मुंबईकर को 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा करनी चाहिए।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (uddhav thackeray) को भेजे गए पत्र में विधायक अतुल भातखलकर ने लिखा है कि, कल मुंबई के BMC कमिश्नर ने बारिश के बारे में बात करते हुए कहा कि, यह एक छोटा तूफान है।  

भातखलकर ने आगे कहा, 12 घंटों में मुंबई में 294 मिमी तक बारिश हुई है। इसका मतलब है कि यह एक प्राकृतिक आपदा है।

भातखलकर ने मांग की है कि, इन दो दिनों में आने वाली बाढ़ को प्राकृतिक आपदा घोषित किया जाना चाहिए और लोगों की 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद करनी चाहिए।

उन्होंने आगे लिखा है कि, कोरोना (Covid-19) के प्रकोप के कारण निम्नमध्यम वर्गीय लोगों के काम धंदे, रोजगार बंद हो गए हैं। लोगों के पास कोई काम नहीं होने के कारण वे आर्थिक रूप से काफी परेशान हैं।

साथ ही राज्य सरकार ने कोरोना महामारी (Coronavirus) के लिए एक भी आर्थिक सहायता प्रदान नहीं की है। जुलाई और अगस्त महीने का राशन भी दुकान पर उपलब्ध नहीं था। और अब यह प्राकृतिक आपदा, इन्हीं सब कारकों को देखते हुए, अतुल भातखलकर ने यह भी मांग की है कि राज्य सरकार को प्राकृतिक आपदा के बाद एक सर्वेक्षण करना चाहिए।

जिस तरह से 26 जुलाई 2005 में आई विनाशकारी बाढ़ के समय पिछली सरकार ने सभी घरों का सर्वेक्षण कर प्रति घर 5,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी थी, उसी प्रकार इस सरकार को भी सभी घरों का सर्वेक्षण करके प्रति घर 10 हजार रुपये की मदद करनी चाहिए।

BJP विधायक ने कहा, कोरोना वायरस के कारण भी पालक मंत्री ने उपनगर में एक भी बैठक आयोजित नहीं की, लेकिन अब प्राकृतिक आपदा के बाद भी, संरक्षक मंत्री को आदेश देना चाहिए कि वे उपनगरों में जनप्रतिनिधियों की बैठक बुलाएं।  

अतुल भातखलकर ने तंज कसते हुए आगे कहा कि अगर वे कोरोना वायरस के डर से वास्तविक बैठक करने से डरते हैं तो कम से कम एक ऑडियो-विजुअल माध्यम से बैठक तो आयोजित की जा ही सकती है।

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